गौरव कुमार AV भारत न्युज संवाददाता बखरी/बेगूसराय
बखरी प्रखंड क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित फर्जी क्लीनिकों का जाल लगातार फैलता जा रहा है, जो आम लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। नामचिन एवं बड़े डॉक्टरों के नाम का साइन बोर्ड लगाकर क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन जांच करने पर सच्चाई कुछ और ही सामने आ रही है। यहां “नाम बड़े दर्शन छोटे” की कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार इन क्लीनिकों में न तो एमबीबीएस डॉक्टर मौजूद रहते हैं और न ही इलाज की कोई मानक व्यवस्था है। अधिकतर जगहों पर झोलाछाप, कंपाउंडर या अप्रशिक्षित व्यक्ति ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। बिना किसी जांच, पैथोलॉजी रिपोर्ट या विशेषज्ञ सलाह के मरीजों को दवाइयां और इंजेक्शन दिए जा रहे हैं, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
बताया जा रहा है कि बुखार, पेट दर्द या सामान्य बीमारी के नाम पर मरीजों को भारी एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड तक दे दिए जाते हैं। वहीं गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों का भी बिना उचित जांच इलाज कर दिया जाता है। हालत बिगड़ने पर मरीजों को आनन-फानन में बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है या फिर क्लीनिक संचालक अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाज के नाम पर गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों से मोटी रकम वसूली जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग मजबूरी में इन क्लीनिकों पर इलाज कराने पहुंचते हैं और बाद में उनकी हालत और ज्यादा खराब हो जाती है। कई मामलों में मरीजों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है पहले गलत इलाज और फिर महंगे निजी अस्पतालों का खर्च। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक इन फर्जी क्लीनिकों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे फर्जी डॉक्टरों के हौसले बुलंद हैं और वे बेखौफ होकर अपना धंधा चला रहे हैं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि बखरी क्षेत्र में संचालित सभी क्लीनिकों की सघन जांच कराई जाए, डॉक्टरों की डिग्री और पंजीकरण की पुष्टि की जाए तथा दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि जब तक प्रशासन सख्ती नहीं दिखाएगा, तब तक मरीजों की जान के साथ यह खिलवाड़ यूं ही चलता रहेगा।
