नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता बेगुसराय
कावर झील के तट पर स्थित प्रसिद्ध जयमंगला मंदिर में पिछले नौ दिनों से चल रहे नवाह अनुष्ठान का समापन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में हुआ। नवाह के अंतिम दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने माता जयमंगला की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जयमंगला मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यही कारण है कि वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवाह के समापन अवसर पर भी मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
जयमंगलागढ़ क्षेत्र का ऐतिहासिक महत्व भी काफी विशेष माना जाता है। यहां हुई पुरातात्विक खुदाई में बौद्धकालीन मूर्तियां प्राप्त हुई हैं, जो इस क्षेत्र की प्राचीन विरासत की ओर संकेत करती हैं। हाल के वर्षों में मंदिर का जीर्णोद्धार और भव्य निर्माण कराया गया है, जिससे इसकी सुंदरता और आकर्षण में और वृद्धि हुई है।
स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि माता जयमंगला अपने दरबार में आने वाले भक्तों की सच्ची श्रद्धा से की गई प्रार्थना अवश्य सुनती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यही आस्था हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को यहां खींच लाती है।
सरकार द्वारा भी जयमंगलागढ़ को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और पूरे मंदिर परिसर में भक्ति एवं उत्साह का वातावरण बना रहा।

