गोपल्लव झा AV भारत न्युज संवाददाता वीरपुर/ बेगुसराय
वीरपुर प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में कार्यरत आशा कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन भी वीरपुर पीएचसी परिसर में उग्र धरना-प्रदर्शन किया। आठ माह से बकाया मानदेय एवं प्रोत्साहन राशि के भुगतान की मांग को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने इमरजेंसी सेवा को छोड़कर अन्य सभी कार्यों को ठप कर दिया।
धरना के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने पीएचसी के मुख्य गेट, ओपीडी, नामांकन काउंटर तथा चिकित्सा कक्ष के सामने प्रदर्शन करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और पीएचसी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
धरना में शामिल आशा कार्यकर्ता चम-चम कुमारी और कुमारी सुमन ने आरोप लगाया कि विभाग से जो भी राशि आती है, उसका भुगतान समय पर नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि बार-बार आठ से दस दिन में भुगतान कराने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
कुछ आशा कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पांच माह का भुगतान भेजने के नाम पर पांच सौ रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। राशि नहीं देने पर जानबूझकर भुगतान में देरी की जा रही है। इन आरोपों के कारण आशा कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा गया।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने बताया कि धरना की सूचना मिलने पर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राम नरेश शर्मा पहुंचे थे। उन्होंने आठ दिन का समय मांगा और आश्वासन देकर लौट गए।
धरना में कुरीयल अवधेश कुमार, मनटुन दास, अशोक महतो, अनिल कुमार सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता मौजूद थीं। इनमें नूतन कुमारी, निशा कुमारी, रीना देवी, ममता कुमारी, पूनम कुमारी, अंजू कुमारी, संगीता कुमारी, किरण कुमारी, आशा देवी, नीतू देवी, सिम्पी देवी, रामसखी कुमारी, कल्पना देवी, चंद्रकला देवी, अर्चना सिन्हा, राधा देवी, निर्मला कुमारी, राम दुलारी देवी, सरिता कुमारी, बाबी देवी समेत अन्य शामिल थीं।
आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि वीरपुर प्रखंड को छोड़कर जिले के अन्य प्रखंडों में मानदेय और प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जा चुका है, जबकि यहां की कार्यकर्ताओं को अब तक भुगतान नहीं मिला है।
इस संबंध में लेखापाल अनुप कुमार गुप्ता ने बताया कि सरकार की ओर से भुगतान प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब राशि ट्रेजरी के माध्यम से दी जाएगी। उन्होंने कहा कि भुगतान से संबंधित कागजात भेजे गए थे, लेकिन 28 मार्च को फाइल रिजेक्ट हो गई, जिसके कारण कुछ विलंब हुआ है।
