गौरव कुमार AV भारत न्युज संवाददाता बखरी/ बेगुसराय
बखरी प्रखंड के राटन पंचायत स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 85 पर बुधवार को अन्नप्राशन दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान छह माह की आयु पूरी कर चुके बच्चों को मां के दूध के साथ उनकी उम्र के अनुसार पौष्टिक ठोस आहार खिलाकर अन्नप्राशन कराया गया। कार्यक्रम के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य और बेहतर विकास को लेकर जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी पर्यवेक्षिका चेतना कुमारी एवं साधना कुमारी के साथ पांच सेविकाएं मौजूद रहीं। सभी ने अभिभावकों को बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जानकारी दी। इस दौरान बच्चों को उम्र के अनुसार पौष्टिक आहार देने तथा उनके स्वास्थ्य पर नियमित रूप से ध्यान देने की अपील की गई।
कार्यक्रम में राटन पंचायत के उपमुखिया अजीत कुमार और वार्ड सदस्य रीता देवी भी मौजूद रहीं। उन्होंने बच्चों को पौष्टिक आहार देने और उनके बेहतर स्वास्थ्य एवं विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बचपन में उचित पोषण मिलने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है।
अन्नप्राशन दिवस के इस आयोजन के माध्यम से बच्चों के स्वस्थ भविष्य के लिए उचित पोषण के महत्व का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भी बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
वीरपुर में सामूहिक रूप से मनाया गया अन्नप्राशन दिवस

गोपल्लव झा, AV भारत न्यूज संवाददाता, वीरपुर/बेगूसराय
वीरपुर प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न पंचायतों में भी बुधवार को आंगनबाड़ी केंद्रों पर अन्नप्राशन दिवस मनाया गया। इस दौरान छह माह की आयु पूरी कर चुके बच्चों को उनकी माताओं की मौजूदगी में पहली बार ऊपरी आहार कराया गया। वहीं, वीरपुर प्रखंड मुख्यालय क्षेत्र स्थित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 94 पर सेविकाओं द्वारा सामूहिक रूप से अन्नप्राशन के साथ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान को लेकर जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का नेतृत्व सीडीपीओ नितेश कुमार ने किया। इस दौरान छह माह की आयु पूरी कर चुके बच्चों को खीर खिलाकर ऊपरी आहार की शुरुआत कराई गई। कार्यक्रम में सेविका, सहायिका, एलएस और सीडीपीओ ने रोल प्ले के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को बच्चों के पोषण और ऊपरी आहार के महत्व के बारे में जानकारी दी।

महिलाओं को बताया गया कि छह माह तक बच्चों के लिए मां का दूध जरूरी है। इसके बाद स्तनपान जारी रखते हुए उम्र के अनुसार ऊपरी आहार भी देना चाहिए। दाल, हरी सब्जियां, दलिया और खिचड़ी जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को बच्चों के भोजन में शामिल करने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान साफ-सफाई, हाथ धोने, स्वच्छ पानी के इस्तेमाल और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। साथ ही बच्चों के नियमित टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और वजन की निगरानी के बारे में माताओं को जागरूक किया गया।
अन्नप्राशन कार्यक्रम के दौरान बच्चों को नए कपड़े भी उपहार स्वरूप दिए गए, जिससे बच्चों और उनके परिजनों में उत्साह देखने को मिला। वहीं, बच्चों के जीवन के प्रथम हजार दिनों पर विशेष ध्यान देने वाली पांच माताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। बताया गया कि इन माताओं के बच्चे फिलहाल आईसीडीएस के निर्धारित मानकों को पूरा कर रहे हैं।

इसी दौरान बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत ग्रामीण महिलाओं को भी जागरूक किया गया। सेविकाओं ने समाज में बेटियों के समान अधिकार और महत्व, कन्या भ्रूण हत्या पर रोक तथा बालिकाओं को बेहतर शिक्षा दिलाने की जरूरत पर जोर दिया।
मौके पर मौजूद पदाधिकारियों और आंगनबाड़ी कर्मियों ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को दूर करना, माताओं को सही पोषण व्यवहार के प्रति जागरूक करना, साफ-सफाई की आदत को बढ़ावा देना तथा समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है।
कार्यक्रम में एलएस डेजी गांधी, सेविका लक्ष्मी कुमारी, गुड़िया कुमारी, नीतू जायसवाल, रुक्मिणी कुमारी, कुमकुम कुमारी समेत दर्जनों ग्रामीण महिलाएं मौजूद थीं।


