विजय भारती ब्यूरो AV भारत न्युज बेगुसराय
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग, बिहार ने प्रदेश के सभी जिलों में विद्यालय से गायब या विद्यालय से बाहर के बच्चों की पहचान के लिए 20 नवंबर से व्यापक गृहवार सर्वेक्षण कराने का निर्देश जारी किया है।
विभागीय निर्देश के अनुसार, सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य 06–14 वर्ष आयु वर्ग के उन सभी बच्चों की पहचान करना है जो अभी तक किसी विद्यालय से जुड़े नहीं हैं या शिक्षा से वंचित हैं। साथ ही, 15–19 वर्ष आयु वर्ग के उन किशोरों को भी चिह्नित किया जाएगा, जिन्होंने किसी कारणवश 10वीं या 12वीं की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई है।
साथ ही ऐसे बच्चों की भी खोज की जायेगी जो लगातार 30 दिनों से विद्यालय से अनुपस्थित रहे हैं,30 दिनों से लगातार विद्यालय नहीं आने वाले बच्चों को छीजित माना जाएगा। शहरी क्षेत्र में रेलवे स्टेशन,बस स्टैंड, मंदिर मसजिद के पास के बच्चे भी चिन्हित किए जायेंगे।पुरे प्रदेश में 20 नवंबर से 20 जनवरी तक सर्वेक्षण कार्य होंगे।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एनइपी 2020 के अनुसार 06–19 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों एवं किशोरों को गुणवत्तापूर्ण तथा समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीइ 2009) के बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे अभी भी विद्यालय से बाहर हैं, जिन्हें मुख्यधारा में लाना आवश्यक है।
सर्वेक्षण को सफल बनाने के लिए राज्य स्तर पर एक विस्तृत सर्वेक्षण प्रपत्र तैयार किया गया है। सभी सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में “हेल्प डेस्क” का गठन किया जाएगा, जहां विद्यालय से बाहर बच्चों की जानकारी एकत्रित की जाएगी।हेल्प डेस्क पर सबसे बेहतर एवं युवा शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जायेगी।24 बिंदुओं पर बच्चे की जानकारी भरी जायेगी। इसके लिए विभाग की ओर से फॉर्मेट तैयार कर भेजा जाएगा।सर्वेक्षण से संबंधित सभी आंकड़ों की एंट्री प्रबंध पोर्टल पर की जाएगी।
इसके लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय-सारणी के अनुसार सभी गतिविधियों का ससमय क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
