विजय भारती ब्यूरो AV भारत न्युज बेगुसराय
भगवानपुर प्रखंड क्षेत्र के महेशपुर पंचायत स्थित अतरूआ गांव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्यों के द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन व सेवा के 100 वर्ष पूरे होने पर संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा गृह संपर्क महाअभियान शूरू किया गया है। इस अभियान का स्लोगन है “आओ बनाएं समर्थ भारत” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर संघ के सदस्यों के द्वारा घर-घर जाकर लोगों को संघ के बारे में, संघ की स्थापना के उद्देश्य, संघ कार्य का विस्तार, सेवा कार्य पंच परिवर्तन व आवाहन के संबंध में उल्लेखित प्रची बांटा जा रहा है साथ ही लोगों को संघ के बारे विस्तार से बताया जा रहा है।
घर-घर पर्ची बांट रहे संघ के सदस्य विरेन्द्र पंडित, महेश साहनी व विपिन कुमार सहनी ने बताया कि संघ के पर्ची के माध्यम से लोगों तक संघ के उद्देश्य को पहुंचाने का काम किया जा रहा है। जिससे लोगों को संघ के कार्य एवं उद्देश्य के बारे में जानकारी मिल सके। उपरोक्त संघ कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से बताया कि 1925 की विजयादशमी (विक्रम संवत् 1982) को स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपना 100 वर्ष पूर्ण कर लिया है। विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन के रूप में स्थापित आर एस एस के शताब्दी वर्ष पर देशभर में इसके संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को याद किया जा रहा है। डॉ. हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े हर प्रयास में सक्रिय रहे। 1921 और 1930 में उन्हें कारावास भी भुगतना पड़ा।

उन्होंने बताया कि संघ की स्थापना ऐसे दौर में हुई जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। डॉ. हेडगेवार का मानना था कि राष्ट्र की स्वतंत्रता, परमवैभव और सामाजिक समस्याओं के समाधान का मार्ग हिन्दू समाज के संगठन में ही निहित है। जाति, भाषा, वेश-भूषा और प्रांत जैसे भेदों से ऊपर उठकर “हिंदुत्व” को जीवनदृष्टि मानते हुए उन्होंने समाज को संगठित करने का संकल्प लिया। इसी उद्देश्य से नित्य ‘शाखा’ की पद्धति विकसित की गई, जिसने लाखों स्वयंसेवकों में अनुशासन, सेवा, देशभक्ति और चारित्रिक गुणों का निर्माण किया। आरंभिक उपेक्षा और विरोध के बाद भी संघ ने अपनी कार्यपद्धति और स्वयंसेवकों के समर्पण के बल पर समाज का विश्वास जीता।
आज संघ का विस्तार देश के लगभग हर हिस्से में है। वर्तमान समय में देश के 924 जिलों में से 98.3 प्रतिशत जिलों में संघ की शाखाएं मौजूद हैं, 6,618 खंडों में से 92.3 प्रतिशत खंडों में कुल 58,939 मंडलों में से 52.2 प्रतिशत मंडलों में, 51,740 स्थानों पर 83,129 दैनिक शाखाएं हैं, जिनमें 59 प्रतिशत शाखाएं छात्रों के है, शेष 41 प्रतिशत शाखाएं व्यवसायी स्वयंसेवकों की है, इसके अतिरिक्त 26,460 स्थानों पर 32,147 साप्ताहिक मिलन आयोजित करने से संघ का देश व्यापी विस्तार हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि आपदा के समय सबसे पहले पहुंचने वाली स्वयंसेवकों की छवि आज पूरे देश में स्थापित है। संघ से जुड़े कार्यकर्ता स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कार और स्वावलंबन से जुड़े 1,29,000 सेवा प्रकल्प चला रहे हैं। ग्राम विकास, जैविक खेती, भारतीय नस्ल की गायों का संरक्षण तथा युवाओं को स्वावलंबन की दिशा में प्रशिक्षण देने के कार्य भी लगातार बढ़ रहे हैं। छुआछूत और जातीय भेदभाव मिटाने पर जोर। पर्यावरण संरक्षण : जल बचत, प्लास्टिक पर रोक और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प। कुटुंब प्रबोधन : परिवार के साथ समय बिताने, सांस्कृतिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने की अपील। स्व आधारित जीवन : स्वदेशी जीवनशैली और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन। नागरिक कर्तव्यबोध : कानून पालन, अनुशासन और जिम्मेदार नागरिकता पर बल।
समग्र समाज को आमंत्रण : संघ का कहना है कि देश की चुनौतियाँ इतनी बड़ी हैं कि अकेला कोई संगठन उन्हें हल नहीं कर सकता। इसलिए सज्जन शक्ति को एकजुट होकर राष्ट्रनिर्माण के इस यज्ञ में सहभागी होना चाहिए। संगठन ने समाज से सक्रिय सहयोग और भागीदारी का आह्वान किया है।
