गोपल्लव झा AV भारत न्युज संवाददाता वीरपुर/ बेगुसराय
इन दिनों वीरपुर प्रखंड क्षेत्र व थाना क्षेत्र के किसानों में दहस्त व भय 24 सो घंटा बना रहता है। जिससे किसानों को दीन में चैन नहीं और रात में नींद नहीं हो रही है। किसानों के दर्द से ना तो पदाधिकारियों को फिक्र है।ना ही जनप्रतिनिधियों को चिंता। आखिर कौन सुनेगा किसानों के दर्द को। किसान जाएं तो जाएं कहां। खेतों में जंगली जानवर का कहर तो बथान में पालतू जानवर गाय, भैंस आदि जानवरों में भंझा रोग से किसानों में अपने पालतू जानवरों को मर जाने का दहस्त। नौला, डीह, भवानंदपुर, वीरपुर पूर्वी, वीरपुर पश्चिम, गेंन्हरपुर, जगदर, और पर्रा पंचायत समेत मैदा भवन्नगामा,सहुरी, रत्नमन भवन्नगामा के किसानों ने बताया कि बहियार में जंगली जानवर निल गाय के आतंक से लहरी, सरसों,आलू,मक्का, गेंहू, धनिया, गोभी, टमाटर आदि फसल बर्बाद हो रहें हैं।

वहीं उक्त पंचायत के किसानों ने यह भी बताया कि बथान पर बंधे दुधारू गाय,भैंस, के अलावे गर्भवती जानवर भंजझा रोग से ग्रस्ति होकर मर जा रहे हैं। अगर बच जा रही है तो वो किसी काम की नहीं रह जाती है। सरकारी चिकित्सालयों में दवा नहीं, चिकित्सकों से भेंट नहीं। और झोला छाप डॉक्टरों की मनमानी फिस की मार झेलने को हम लोग विवस हैं।हम लोगों के द्वारा उत्पादित दुध का ना तो उचित दाम मिल रहा है ना ही माप। आखिर कहां जाएं किसको सुनाएं जो हम किसानों की समस्याओं का हल हो सकें।
क्या है भंजझा रोग
यह एक संक्रांति रोग है। इसमें जानवरों के मुंह,नाक से लसिला और झाग के साथ पानी आता है। मुंह में फोरा,खुर में फोरा और घाव,तेज बुखार। जिससे जानवर को मुंह खोलने में परेशानी, चलने फिरने में लंगराना आदि हुआं करते हैं।
इसके फैलने के कारण रोगग्रस्त जानवरों को रह रहे बथानों पर अन्य किसानों को देखने जाना,छुना, फिर दुसरे जानवरों के बथान पर जाना, जानवरों को छुना,मच्छर,मखी, आदि
