गौरव कुमार AV भारत न्युज संवाददाता बखरी/बेगूसराय
बखरी प्रखंड के मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को छात्रों के शैक्षणिक परिभ्रमण मद की राशि अब तक नहीं मिलने से शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। विभागीय निर्देश के आलोक में फरवरी 2026 में विद्यालयों द्वारा अपने स्तर से खर्च वहन कर छात्रों को परिभ्रमण कराया गया था। इसके बाद संबंधित प्रधानाध्यापकों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत बिल-वाउचर भी विभाग में जमा कर दिए, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बावजूद भुगतान नहीं हो सका है।
मध्य विद्यालय बहुआरा के शिक्षक दिलीप कुमार ने बताया कि विभाग के निर्देश पर छात्रों को शैक्षणिक भ्रमण कराया गया था। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रधानाध्यापकों ने निजी संसाधनों और अपने खर्च से व्यवस्था की।
परिभ्रमण संपन्न होने के बाद सभी आवश्यक कागजात विभाग को सौंप दिए गए, लेकिन अब तक राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इससे प्रधानाध्यापकों को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर लगातार संपर्क किए जाने के बावजूद कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है।
भुगतान में हो रही देरी से शिक्षकों के बीच असंतोष और नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि जब विभागीय आदेश पर कार्यक्रम कराया गया तो समय पर राशि का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए था।
वहीं, मध्य विद्यालय बखरी, उत्क्रमित मध्य विद्यालय गोढ़ियारी तथा कन्या मध्य विद्यालय बखरी के प्रधानाध्यापकों ने भी बताया कि उनके विद्यालयों को भी अब तक परिभ्रमण मद की राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। उन्होंने कहा कि कई बार विभागीय अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया गया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
शिक्षकों का कहना है कि राशि भुगतान में लगातार हो रही देरी से भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के संचालन को लेकर भी संशय की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से विद्यालय प्रधानों का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
हालांकि विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ विद्यालयों को परिभ्रमण मद की राशि उपलब्ध करा दी गई है। शेष बचे विद्यालयों में भी राशि भेजने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही भुगतान कर दिए जाने की संभावना है। इसके बावजूद भुगतान में हो रही देरी को लेकर शिक्षकों के बीच असंतोष कम नहीं हुआ है।अब सभी की निगाहें विभाग पर टिकी हैं कि लंबित राशि का भुगतान कब तक किया जाता है और प्रधानाध्यापकों को इस समस्या से राहत मिलती है।
