गोपल्लव झा AV भारत न्युज संवाददाता वीरपुर/बेगूसराय
वीरपुर स्थित महिनाथ स्थान में आयोजित सात दिवसीय श्रीविष्णु महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
कथा के पांचवें दिन अयोध्याधाम से पधारे कथावाचक गरुणेशजी महाराज ने श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते हुए भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि बाल्यावस्था में भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के घरों में जाकर माखन और दही चुराया करते थे, जिसके कारण उन्हें माखनचोर के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि जब बाल कृष्ण ने मिट्टी खाई और माता यशोदा ने उन्हें डांटा, तब उन्होंने अपना मुख खोला, जिसमें माता को संपूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन हुआ।

कथावाचक ने गोवर्धन पूजा प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र की पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा करने के लिए प्रेरित किया। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा कर दी, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की। उन्होंने यह भी बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अनेक असुरों का संहार कर धर्म की स्थापना की।
गरुणेशजी महाराज ने कहा कि भगवान सदैव निर्मल और सच्चे मन वाले भक्तों की सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान से भी बड़ा उनका नाम है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए। कथा के दौरान विभिन्न प्रसंगों और भजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत की महत्ता से अवगत कराया गया।
इस अवसर पर पंडित राजगुरु, पूर्व मुखिया पंकज कुमार सिंह, अनिता देवी, उपमुखिया मीनू देवी, विनोद कुमार, रामूर्ति सिंह, पूरन झा, शिक्षक सर्वेश झा, रंजन कुमार झा, राजेश कुमार, डॉ. राम आह्लाद राय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
