युद्ध खत्म, फिर भी नियम में ढील नहीं; सत्तू-चूड़ा खाकर दिन काटने को मजबूर लोग
विजय भारती ब्यूरो AV भारत न्युज बेगुसराय
भगवानपुर प्रखंड क्षेत्र में एलपीजी उपभोक्ताओं को जरूरत भर भी गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। जिन घरों में 15-20 दिन में एक सिलेंडर की खपत है, वहां सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है। ग्रामीण वितरक पहले 20-25 दिनों में सिलेंडर उपलब्ध करा देता था, लेकिन अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से 45-50 दिन में एक सिलेंडर देने का नियम बना दिया गया।
समस्या यह है कि जिन घरों में लकड़ी या गोबर के उपले पर खाना बनाने की कोई व्यवस्था नहीं है, उनके सामने रोज भोजन का संकट खड़ा हो गया है। बाजार से इंडक्शन चूल्हा भी गायब है। ऐसे में कई परिवार सत्तू तो कभी चूड़ा-दही खाकर दिन बिताने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब युद्ध समाप्त हो चुका है, फिर भी सिलेंडर वितरण का नियम जस का तस बना हुआ है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि सरकार ने पहले गैस और बिजली की आदत डलवाई और जब लोग पूरी तरह निर्भर हो गए तो किसी न किसी बहाने आपूर्ति पर अंकुश लगा दिया गया।
उपभोक्ताओं ने सरकार से मांग की है कि पूर्व की तरह समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए ताकि रोजमर्रा की परेशानी दूर हो सके।
लोगों का कहना है कि भोजन जैसी मूलभूत आवश्यकता पर सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए, जिसके बिना जीवन संभव नहीं है।

