नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नावकोठी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। न्यूनतम व अधिकतम तापमान में काफी गिरावट दर्ज की गई है। भगवान भास्कर का दर्शन दुर्लभ हो गया है। खेतों में काम करने वाले किसान व मजदूरों का हाल बेहाल है।ऐसे में लोग हर घर,चौक- चौराहा पर अलाव जलाकर ठंड को भगाने का प्रयास कर रहे हैं।
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ कुंदन कुमार ने बताया कि अत्यधिक ठंड के कारण लोग रात में कमरे में अलाव जलाकर सो रहे हैं जिससे लगातार दुर्घटना हो रही है।उन्होंने बताया कि ठंड में अंगीठी जलाकर बंद कमरे में सोना काफी खतरनाक हो सकता है।अंगीठी जलने पर कार्बन मोनोऑक्साइड गैस निकलती है जो बिना रंग,गंध और विना स्वाद की होती है।सोते समय पता ही नहीं चलता है।खून में ऑक्सीजन की जगह ले लेती है।इससे धीरे- धीरे दम घुटता है और व्यक्ति को पता भी नहीं चलता।
शुरुआती लक्षण में सिर दर्द,चक्कर, उल्टी,थकान व गंभीर स्थिति में बेहोशी,सांस रूकना,दिल पर असर और अचानक मौत हो सकती है।अंगीठी कमरे की ऑक्सीजन खा जाती है। CO₂ और CO बढ जाती है।दिमाग व दिल को ऑक्सीजन कम मिलती है।फेफड़े और दिल के मरीजों के लिए ज्यादा खतरनाक है।खासकर अस्थमा,हार्ट डिजीज, बुजुर्ग व छोटे बच्चों को इनमें खतरा कई गुना बढ़ जाता है।इसीलिए ठंड में सबसे सुरक्षित विकल्प है रजाई,कंबल व गर्म कपड़े।कमरे से बाहर अंगीठी का प्रयोग कर सकते हैं।
