नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नावकोठी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत समसा पंचायत के करैटार मां चंडिका स्थान में एक दिवसीय पशु स्वास्थ्य शिविर एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम दीप प्रज्वलित कर शुरूआत किया गया।
मंच संचालन गौतम गोस्वामी ने किया। इस शिविर में गांव एवं आसपास के क्षेत्रों से 150 से अधिक किसानों ने भाग लिया।कार्यक्रम का उद्देश्य पशुपालकों को वैज्ञानिक पद्धति से पशुपालन की जानकारी देना,पशुओं के स्वास्थ्य की जांच करना तथा उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ना था।
शिविर के दौरान उपस्थित किसानों को पशुओं के कृमिनाशन (कृमिकरण),नियमित टीकाकरण, बधियाकरण तथा विभिन्न संक्रामक एवं असंक्रामक रोगों की पहचान एवं रोकथाम के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। पशुओं के संतुलित आहार,हरे चारे की उपलब्धता,भूसे के उपचार तथा साल भर चारा प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों पर विशेष चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर टीकाकरण और संतुलित पोषण से पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता बढ़ती है तथा रोगों की संभावना कम होती है।
पैरावेट लक्ष्मण कुमार ने कृत्रिम गर्भाधान (एआई) की प्रक्रिया, उसके लाभ तथा उन्नत नस्ल सुधार के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।उन्होंने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान अपनाने से पशुओं की नस्ल में सुधार होता है और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होती है।
सीआरपी गौतम गोस्वामी ने पशुपालन से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं,अनुदान, बीमा योजना एवं ऋण सुविधा की जानकारी साझा की।उन्होंने किसानों से अपील की कि वे योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आय में वृद्धि करें।राजीव कुमार पाठक ने पशुओं की उचित देखभाल,संतुलित आहार,मिनरल मिक्सचर के उपयोग एवं स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला।उन्होंने बताया कि सही पोषण और साफ- सफाई से पशुओं की उत्पादकता एवं स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
प्रदान संस्था से शिवचंद्र कुमार ने जैविक खाद बनाने की प्रक्रिया,गोबर एवं कृषि अवशेषों के सही उपयोग तथा उसके कृषि में लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी दी।उन्होंने किसानों को जैविक पद्धति अपनाकर लागत कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने की सलाह दी।इसी संस्था से अफसाना रोजी ने कहा कि इस प्रकार के पशु शिविर किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे पशुपालन एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित होता है।
कार्यक्रम के अंत में किसानों ने इस पहल की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित करने की मांग की।इस आयोजन को सफल बनाने में रिंकू,रेखा, अमल महतो,बरखा रानी एवं रेनू का महत्वपूर्ण योगदान रहा।इनके सहयोग और सक्रिय भागीदारी से कार्यक्रम सुव्यवस्थित एवं सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।
यह शिविर पशुपालकों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं लाभकारी साबित हुआ तथा पशुपालन को आत्मनिर्भरता एवं आय वृद्धि के सशक्त माध्यम के रूप में बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ।
