अशोक कुमार ठाकुर AV भारत न्युज संवाददाता तेघड़ा/ बेगुसराय
जिला पदाधिकारी बेगूसराय के निर्देशानुसार श्रम संसाधन विभाग की ओर से बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत तेघड़ा प्रखंड में सोमवार को विशेष अभियान चलाया गया। इस अवसर पर एक धावादल टीम का गठन किया गया था, जिसमें श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी तेघड़ा सुश्री झुमा भंडारी, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बखरी श्री रंजन कुमार, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मंसूरचक श्री मुन्ना कुमार, तेघड़ा थाना से पुलिस अवर निरीक्षक तथा एनजीओ वैशाली समाज कल्याण संस्थान से सहयोगी राजमणि रंजन शामिल थे। धावादल टीम ने स्टेशन रोड तेघड़ा स्थित एक निजी होटल में छापेमारी कर एक कार्यरत बाल श्रमिक को विमुक्त कराया। इस कार्रवाई के बाद दुकानदारों और होटल-रेस्तरां संचालकों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बाल श्रमिकों से काम कराने वालों में स्पष्ट संदेश गया कि अब ऐसे कृत्य को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नियोजक के विरुद्ध विधिसम्मत सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है, वहीं विमुक्त बच्चे को सुरक्षित रूप से जिला स्थित बाल कल्याण समिति, बेगूसराय को सुपुर्द कर दिया गया है। कार्रवाई के उपरांत श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी तेघड़ा सुश्री झुमा भंडारी ने कहा कि बाल श्रम एक सामाजिक अभिशाप है और बच्चों से मजदूरी कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रशासन इस दिशा में लगातार प्रयासरत है और भविष्य में भी ऐसे अभियान चलते रहेंगे ताकि बच्चों का जीवन मजदूरी के बोझ तले दबने के बजाय शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य से जुड़े। उन्होंने यह भी कहा कि बाल श्रम करने वाले नियोजकों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा और उन पर कठोरतम कार्रवाई होगी। तेघड़ा प्रखंड में हुई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि प्रशासन बाल श्रम जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए गंभीर और प्रतिबद्ध है। इस अभियान ने दुकानदारों और आमजन के बीच चेतावनी और जागरूकता दोनों संदेश दिए हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि क्षेत्र में बाल श्रम की समस्या पर अंकुश लगेगा और बच्चे शिक्षा तथा सामाजिक विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
