नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
मुसलमानों का पवित्र महीना रमजान की शुरूआत गुरूवार से हो गयी।मुस्लिम आबादी में रमजान के महीने की शुरूआत होने से खास तरह की हलचल देखी जा रही है।बुधवार की संध्या चांद की दीदार होने के बाद नावकोठी, हसनपुर बागर,इसफा, विष्णुपुर,सैदपुर,देवपुरा,रजाकपुर,समसा, पहसारा,खैरबन, छतौना,वृंदावन में महिला पुरुष घरों से लेकर मस्जिद तक तराबीह और इबादत में गुजारना शुरू कर दिया हैं।
इस्लामी कैलेंडर का सबसे अहम तरीन और पाक महीना माह-ए- रमजान है।इसी महीने में कुराॅन शरीफ दुनिया में नाजिल हुई।यह महीना इस्लाम के मानने वाले को ही नहीं बल्कि समूची इंसानियत को आपसी मुहब्बत,बाहेमी इमदाद(आपसी सहयोग)और भाईचारे का पैगाम देती है।
नावकोठी जामे मस्जिद के इमाम हाफिज मो असगर ने बताया कि पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद (सअव) के मुताबिक रोजा बन्दों को जब्ते नफ्स यानी चाहत, ख्वाहिंश पर काबू और परहेजगारी की सीख देती है।दरअसल इंसान का जिस्म और रूह दोनों आपसी तालमेल से वजूद में है।आम तौर पर इंसान जिस्मानी जरूरतों भूख,प्यास,चाहत, जिस्मानी ख्वाहिंश आदि के इर्द-गिर्द ही घूमते रहता है।रमजान दुनियावी कशिश ऐश इशरत से परहेज रखने का नाम है।रमज़ान के पहले दस दिन या पहला अशरा ‘रहमत’ का है जब वह रोजेदारों पर रहमतों की बारिश करता है।
बंदे के इबादतों में मिलने वाले एक नेकी(पुण्य) के जगह सत्तर गुना नेकी में इजाफा कर दिया जाता है।रमजान का मतलब अरबी जुबान में “रम्ज” से रमजान के महीने को जाना गया।रम्ज का मानी होता है”जला देना”यानी बंदे इस महीने में अपने किये हुए गुनाहों से पाक होने के लिए भूख प्यास और दुनियावी ख्वाहिंशों को छोड़कर खुद को जलाता है।इस तरह अरबी महीने में इसे सभी महीनों का सरदार भी कहा जाता है।
