नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नावकोठी प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत अयोध्या प्रसाद सिंह खेल मैदान नावकोठी व समसा में चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की गई।ब्रह्म का अर्थ तपस्या और चारिणी का अर्थ आचरण करने वाली है।मां ब्रह्मचारिणी ज्ञान, तपस्या और वैराग्य की देवी मानी जाती हैं।कठोर साधना व ब्रह्म में लीन रहने के कारण इनको ब्रह्मचारिणी कहा गया है।
इनकी उपासना से जीवन में मानसिक शांति,चंद्रमा की कमजोर स्थिति का समाधान और साधना में सफलता प्राप्त होती है।मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है।जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते हैं, वो जीवन के कठिन समय में भी संघर्ष से विचलित नहीं होते हैं। भक्तों में त्याग, सदाचार,संयम की बढ़ोतरी होती है।
पौराणिक कथा के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी ने दक्ष प्रजापति के घर पुत्री रूप में जन्म लिया था। उन्होंने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की।जब भगवान शिव नहीं मानें तो उन्होंने इन चीजों का भी त्याग कर दिया और बिना भोजन व पानी के अपनी तपस्या को जारी रखा।पत्तों को भी खाना छोड़ देने के कारण उनका एक नाम ‘अर्पणा’ पड़ गया। इस तपस्या से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया।
माता की तपस्या को देखकर ब्रह्माजी ने कहा कि देवी,आपकी मनोकामना पूरी होगी। जल्द ही भगवान चंद्रमौलि शिवजी तुम्हे पति के रूप में प्राप्त होंगे।इसके कुछ दिनों बाद उनका विवाह महादेव शिव के साथ हो गया।
