नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कात्यायनी की पूजा अर्चना की गई। इस बार शारदीय नवरात्रि पर चौथ तिथि दो दिन पड़ने के कारण आज नवरात्रि के सातवें दिन मां के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की गई।पंडित दीपक कुमार दानेश ने बताया कि देवी पुराण के अनुसार मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करने से सभी तरह के पापो से मुक्ति मिल जाती है और जीवन में सुख, आनंद और समृद्धि की प्राप्ति होती है। मां कात्यायनी का स्वरूप बहुत ही अद्बभुत है जिसमें माता का स्वर्ण के समान चमकीला वर्ण,सिंह वाहन और चार भुजाओं वाली माँ कात्यायनी अत्यंत तेजस्विनी प्रतीत होती हैं।इनके बाएं हाथ में कमल और तलवार है, वहीं दाहिने हाथ आशीर्वाद और स्वास्तिक मुद्रा से सुशोभित हैं।भगवान कृष्ण को पाने की कामना से व्रज की गोपियों ने इन्हीं की आराधना यमुना तट पर की थी।मां कात्यायनी की नवरात्रि के दिनों में पूजा,तप और आराधना करने से तन कांतिमान होता है और गृहस्थ जीवन सुखमय बनता है।भक्तों ने मां कात्यायनी का ध्यान मंत्र:- वन्दे वांछित मनोरथार्थ चन्द्रार्घकृत शेखराम्।सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा कात्यायनी यशस्वनीम्।स्वर्णाआज्ञा चक्र स्थितां षष्टम दुर्गा त्रिनेत्राम्। वराभीत करां षगपदधरां कात्यायनसुतां भजामि॥पटाम्बर परिधानां स्मेरमुखी नानालंकार भूषिताम्। मंजीर,हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥प्रसन्नवदना पञ्वाधरां कांतकपोला तुंग कुचाम्।कमनीयां लावण्यां त्रिवलीविभूषित निम्न नाभिम॥ का पाठ किया।
