नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नावकोठी प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन एपीएस नावकोठी के खेल मैदान व समसा में चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना की गई। इस दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कुष्मांडा की पूजा की जाती है।
देवी भागवत पुराण के अनुसार,मां कुष्मांडा की पूजा करने से विद्यार्थियों के ज्ञान में वृद्धि होती है और बुद्धि का विकास होता है। साथ ही,उनकी पूजा से काम आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं।मान्यता है की मां का रूप बहुत ही आलौकिक और दिव्य हैं।दुर्गा माता के स्वरूपों का वर्णन देवी भागवत पुराण में भी किया गया है।माता के इस रूप की पूजा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है।
मान्यता है की मां कुष्मांडा मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली देवी हैं। देवी शेर की सवारी करती हैं और उनकी आठ भुजाओं में अस्त्र हैं।मां कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी।इसी के चलते देवी को कुष्मांडा मां के नाम से जाना जाने लगा।सृष्टि के आरंभ में चारों तरफ जो अधंकार था मां ने उसे अपनी हंसी से दूर किया।माता के भीतर सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति है।
माता कुष्मांडा शेर की सवारी करती हैं और उनकी आठ भुजाएं हैं।जिनमें अस्त्र मौजूद हैं।उनकी भुजाओं में कलश, कमल,सुदर्शन चक्र और कमंडल सुशोभित है।मां का चौथा स्वरूप जीवन जातक को शक्ति प्रदान करने वाला माना गया है। उनका रूप बहुत दिव्य और आलौकिक है।मां कुष्मांडा सृष्टि की आदि-शक्ति हैं, जिन्होंने अंधकार के समय अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। उन्हें ‘अष्टभुजा’ देवी भी कहा जाता है, जिनका तेज सूर्य के समान है। मान्यता है कि उनका निवास सूर्यलोक में है और वे अपनी पूजा से रोग व कष्ट दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
