नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगुसराय
नावकोठी प्रखंड क्षेत्र के सभी पंचायतों में हिंदू धर्मावलंबियों ने श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ अक्षय तृतीया का पर्व मनाया। सुबह से ही मंदिरों एवं घरों में पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। लोगों ने शुभ कार्यों की शुरुआत की तथा दान-पुण्य कर सुख-समृद्धि की कामना की।
हिंदू पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया का पर्व प्रत्येक वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को वर्ष का सबसे शुभ दिन तथा अबूझ मुहूर्त माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के विवाह, गृह प्रवेश, खरीदारी, व्यवसाय आरंभ एवं अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए दान-पुण्य का फल अक्षय अर्थात कभी समाप्त नहीं होने वाला माना गया है। यही कारण है कि लोग इस अवसर पर जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करते हैं।
पंडित माधव पाठक ने बताया कि अक्षय तृतीया का विशेष महत्व सनातन धर्म के पवित्र ग्रंथों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि इसी तिथि को सतयुग का समापन और त्रेतायुग का आरंभ हुआ था। सतयुग में भगवान विष्णु के मत्स्य, कूर्म, वराह और नृसिंह अवतार हुए थे, जबकि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम का प्राकट्य हुआ।
उन्होंने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म भी हुआ था। इसलिए इस दिन परशुराम जयंती भी श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है।
धार्मिक कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता दूर कर उन्हें वैभव प्रदान किया था। वहीं महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान भगवान सूर्यदेव ने उन्हें अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे उन्हें कभी अन्न की कमी नहीं हुई।
अक्षय तृतीया के अवसर पर क्षेत्र के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। लोगों ने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली के लिए पूजा-अर्चना की। पूरे प्रखंड क्षेत्र में पर्व को लेकर उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा गया।
