नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नावकोठी प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत एपीएस खेल मैदान नावकोठी व समसा दुर्गा मंदिर में कलश स्थापना के साथ चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई।आज नवरात्रि का पहला दिन हैं। आज के दिन मां दुर्गा के सर्वप्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की गई।
कलश स्थापना के बाद विधि-विधान से मां शैलपुत्री की पूजा और भोग लगाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।माता शैलपुत्री को शक्ति का प्रतीक माना जाता है।ज्योतिष शास्त्र में मां शैलपुत्री को चंद्रमा ग्रह की स्वामी माना जाता है।
नवरात्रि के पहले दिन मां की पूजा करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है।देवी भागवत पुराण के अनुसार आदिशक्ति का यह प्रथम रूप शांत और तेजस्वी है। वृषभ पर सवार श्वेत वर्ण में मां के दाहिने हाथ में त्रिशुल है जो शक्ति का प्रतीक है।मां के बाएं हाथ में कमल का फूल पवित्रता को दर्शाता है।वहीं,मां के मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मां दुर्गा का जन्म पर्वत राज हिमालय के घर हुआ था।इस वजह से मां के इस अवतार को शैलपुत्री कहा जाता है। जिसका अर्थ होता है पर्वत की पुत्री।
मां की सवारी बैल होने से उन्हें वृषारुधा के नाम से भी जाता जाता है।नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को सफेद रंग की वस्तुओं का भोग लगाना अत्यंत ही शुभ माना जाता है।मां को सफेद रंग की वस्तुएं प्रिय हैं।सफेद रंग को शांति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता इसलिए मां को गाय के दूध से बनी खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाया गया।
मां को सफेद वस्तुओं का भोग लगाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है।पौराणिक कथा के अनुसार पूर्व जन्म में मां शैलपुत्री देवी सती के रुप में प्रकट हुई थीं।धार्मिक मान्यता के अनुसार,मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना करने से जातक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
