नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन पर मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की गई। मां चंद्रघंटा देवी साधकों को धैर्य,ताकत और मन की शांति देती हैं।मां के माथे पर घंटी के जैसे आधा चांद होता है,इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका रूप बहुत ही तेजस्वी और शक्तिशाली होता है, वे युद्ध की मुद्रा में होती हैं।मां के दस हाथ होते हैं जिनमें अलग-अलग हथियार और कमल का फूल होता है।उनका वाहन शेर है, जो साहस और वीरता का निशान है।पंडित नरेश मिश्रा ने बताया कि चंद्रघंटा देवी कथा के अनुसार,जब महिषासुर नामक दैत्य का आतंक बढ़ने लगा और उसने देवताओं के अधिकार छीन लिए, तब देवी दुर्गा ने मां चंद्रघंटा का रूप धारण किया। ब्रह्मा,विष्णु और महेश के क्रोध से उत्पन्न ऊर्जा से देवी प्रकट हुईं, जिन्हें सभी देवताओं ने अपने-अपने अस्त्र दिए, जिसमें इंद्र ने अपना घंटा भी भेंट किया। मां चंद्रघंटा ने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया और पृथ्वी पर शांति स्थापित की। चंद्रघंटा माता की विधिपूर्वक पूजा अर्चना करने से जातक के सुखों में वृद्धि होती है और समाज में सम्मान भी बढ़ता है।इस दिन माता के इस शांत स्वरूप की पूजा करने से आत्मविश्वास और भौतिक सुखों में वृद्धि होती है।मां के भक्तों ने माता चंद्रघंटा देवी के मंत्रों का जाप किया।
