भाई-बहन के अटूट रिश्ते का प्रतीक है रक्षाबंधन
नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता बेगूसराय
बेगूसराय जिले में शुक्रवार को रक्षाबंधन का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी खुशहाली और लंबी उम्र की कामना की।
हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि शुक्रवार, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया गया। इस पर्व को भाई-बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। पर्व के अवसर पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा, चंदन और कुमकुम का तिलक लगाया और मिठाई खिलाई। वहीं भाइयों ने भी बहनों की रक्षा का वचन देते हुए उन्हें उपहार भेंट किए।
देवी लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी है कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन की एक कथा देवी लक्ष्मी और राजा बलि से जुड़ी है। कथा के अनुसार एक बार राक्षसों के राजा बलि ने अपनी भक्ति और तपस्या से भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया। इसके बाद उन्होंने भगवान विष्णु से अपनी रक्षा का वचन मांगा। भगवान विष्णु ने अपना वादा निभाते हुए बलि के द्वारपाल बनना स्वीकार कर लिया।
भगवान विष्णु के इस प्रकार बलि के यहां रहने से देवी लक्ष्मी चिंतित हो उठीं। इसके बाद देवी लक्ष्मी ने साधारण स्त्री का रूप धारण कर राजा बलि के पास पहुंचकर उन्हें राखी बांध दी। इससे भावुक होकर राजा बलि ने देवी लक्ष्मी से मनचाही इच्छा मांगने को कहा। तब देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को द्वारपाल के दायित्व से मुक्त करने का वचन मांगा। राजा बलि ने उनकी इच्छा स्वीकार कर ली।
श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा भी प्रचलित
रक्षाबंधन से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कथा श्रीकृष्ण और द्रौपदी की है। मान्यता के अनुसार एक बार श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लग गई और उससे रक्त बहने लगा। यह देखकर द्रौपदी परेशान हो गईं और उन्होंने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया।
द्रौपदी के इस प्रेम और स्नेह से श्रीकृष्ण भावुक हो गए। उन्होंने द्रौपदी को वचन दिया कि जब भी उन पर कोई संकट आएगा, वे उनकी रक्षा करेंगे। इसी भाई-बहन जैसे स्नेह, प्रेम और रक्षा के भाव के कारण रक्षाबंधन का पर्व आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है।


