नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नवरात्रि के पांचवें दिन भी की गई माता कुष्मांडा की पूजा अर्चना।पंडित माधव पाठक ने बताया कि इस वर्ष नवरात्रि 10 दिन की हैं।चतुर्थी तिथि में वृद्धि की वजह से इस साल मां के चौथे स्वरूप की पूजा 25 और 26 सितंबर दोनों दिन की गईं।मान्यता है कि मां कूष्मांडा की उपासना करने से साधक के सभी रोग, दोष और कष्ट समाप्त होते हैं तथा उसे यश, बल, धन और वैभव की प्राप्ति होती है। मां का स्वरूप अष्टभुजा (आठ भुजाओं वाला) है, इस कारण उन्हें ‘अष्टभुजा देवी’ भी कहा जाता है। सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र और गदा सुशोभित रहते हैं, जबकि आठवें हाथ में जपमाला धारण है। मां सिंह पर सवार होकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। शास्त्रों के अनुसार मां कुष्मांडा ब्रह्मांड के केंद्र में निवास करती हैं और समस्त सृष्टि की रचना की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनका तेज और कांति सूर्य के समान बताई गई है।वे सूर्यमंडल के भीतर स्थित हैं और उनकी दिव्य आभा से संपूर्ण दिशाएं आलोकित होती हैं। इसलिए भक्तों के जीवन में प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता लाने के लिए इस दिन मां की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
