नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज
नवरात्रि के नौवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा अर्चना की गई। माता महागौरी की पूजन से जीवन में सुख-समृद्धि व वैवाहिक जीवन में खुशियां बनी रहती हैं। देवीभागवत पुराण के अनुसार, मां के नौ रूप और 10 महाविद्याएं सभी मां आदिशक्ति भवानी के अंश और स्वरूप हैं लेकिन देवों के देव महादेव के साथ उनकी अर्धांगिनी के रूप में महागौरी ही विराजमान रहती हैं।श्वेते वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचिः।महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोदया।। इनका रूप पूर्णतः गौर वर्ण है।इनकी उपमा शंख,चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है।अष्टवर्षा भवेद् गौरी यानी इनकी आयु आठ साल की मानी गई है। इनके सभी आभूषण और वस्त्र सफेद हैं। इसीलिए उन्हें श्वेताम्बरधरा कहा गया है। भुजाएं 4 हैं और वाहन वृषभ है इसीलिए वृषारूढ़ा भी कहा गया है।इनके ऊपर वाला दाहिना हाथ अभय मुद्रा है तथा नीचे वाला हाथ त्रिशूल धारण किया हुआ है।ऊपर वाले बाँये हाथ में डमरू व नीचे वाले हाथ वर मुद्रा में है। इनकी पूरी मुद्रा बहुत शांत है। पति रूप में शिव को प्राप्त करने के लिए महागौरी ने कठोर तपस्या की थी।इसी वजह से इनका शरीर काला पड़ गया लेकिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनके शरीर को गंगा के पवित्र जल से धोकर कांतिमय बना दिया।उनका रूप गौर वर्ण का हो गया। इसीलिए ये महागौरी कहलाईं।इनकी पूजा से भक्तों के तमाम पूर्व संचित पाप नष्ट हो जाते हैं।महागौरी का पूजन- अर्चन,उपासना- आराधना कल्याणकारी है।इनकी कृपा से अलौकिक सिद्धियां भी प्राप्त होती हैं।
