अशोक कुमार ठाकुर AV भारत न्युज संवाददाता तेघड़ा/बेगूसराय
बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी जोरों पर है। शुक्रवार को नामांकन समापन के पश्चात तेघड़ा विधानसभा क्षेत्र की सियासत में सरगर्मी बढ़ गई है। इस बार सत्ताधारी एनडीए और इंडिया महागठबंधन के कार्यकर्ता और समर्थक काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। ऐसे में तेघड़ा विधानसभा सीट का चुनाव काफी अहम होगा, जो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का पुराना गढ़ माना जाता रहा है।
तेघड़ा विधानसभा में इस बार मुख्य रूप से इंडिया गठबंधन से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के निवर्तमान विधायक राम रतन सिंह, एनडीए गठबंधन से भारतीय जनता पार्टी के रजनीश कुमार, जनशक्ति जनता दल से चंद्र प्रकाश सिंह, जन सुरज से रामनंदन सिंह, समता पार्टी से अविनाश भारती और बहुजन समाज पार्टी से मोहम्मद शकील सहित कुल 14 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किया।
समीक्षाएं के बाद शनिवार को सभी नामांकन वैध घोषित किए गए। अब सभी प्रत्याशी मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में गोल बंद करने हेतु जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया है।
तेघड़ा विधानसभा से 2020 में सीपीआई से राम रतन सिंह ने जदयू के वीरेंद्र कुमार को बड़े वोटों के मार्जिन से हराया था। हार का अंतर 47,979 वोटों का था। राम रतन सिंह 85,229 वोट हासिल किए थे, जबकि वीरेंद्र कुमार को 37,250 वोट मिले। वही इस सीट पर लोजपा से ललन कुंवर को 29,936 वोट मिले थे। लोजपा ने जदयू को भारी नुकसान पहुंचाया था।
लेकिन इस बार चिराग पासवान एनडीए में शामिल होकर चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा को प्रथम बार पराजित करने वाले ललन कुंवर फिर इस बार अपनी उम्मीदवारी दी है। इस बार दोनों गठबंधनों के बीच मुकाबला दिलचस्प बनता जा रहा है।
विधायक राम रतन सिंह बेगूसराय के पुराने और दिग्गज नेता माने जाते हैं। कांग्रेस नेता और जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार के चाचा हैं। वही रजनीश कुमार भारतीय जनता पार्टी के काद्यावर नेता एवं पूर्व विधान पार्षद के रूप में अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं।
पूर्व के बरौनी और वर्तमान के तेघड़ा विधानसभा में कुल 15 चुनावों में छह बार ‘तेघड़ा’ और नौ बार ‘बरौनी’ के नाम से मतदान हुआ। इस सीट पर सीपीआई का दबदबा अटल रहा। बिहार और देश के अन्य हिस्सों में सीपीआई का जनाधार कमजोर पड़ने के बावजूद, यह क्षेत्र पार्टी के मजबूत गढ़ों में शुमार है।
2008 परिसीमन के बाद क्षेत्रीय बदलावों ने सीपीआई की पकड़ को चुनौती दी। 2010 में भाजपा के ललन कुंवर ने सीट जीती, जबकि 2015 में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से वीरेंद्र कुमार ने बाजी मार ली। लेकिन 2020 में महागठबंधन के तहत सीपीआई को यह सीट मिली और पार्टी ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार को 47,979 वोटों के भारी अंतर से हराकर 11वीं बार इतिहास रचा।
2025 के चुनाव को लेकर विधानसभा अंतर्गत 339 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
मतदाता सूची में कुल 2,99,585 नाम दर्ज हैं, जिनमें 1,57,920 पुरुष और 1,41,656 महिलाएं हैं।
