नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नावकोठी प्रखण्ड क्षेत्र अन्तर्गत डफरपुर पंचायत के छतौना स्थित छतौना मध्य विद्यालय कभी क्षेत्र का सबसे पुराना और आदर्श विद्यालय के रूप में जाना जाता था।इस विद्यालय को अच्छे शिक्षकों व विद्वान प्रधानाध्यापकों का सानिध्य प्राप्त था जिससे इसकी ख्याति दूर-दूर तक थी।चूंकि इस पंचायत में एक मात्र मध्य विद्यालय था जहां इस प्रखंड के ही नहीं बगल के सदर प्रखंड बेगूसराय के अझौर,परना व बंद्वार के बच्चे भी पढ़ने आते थे।
बिहार में जहां विद्यालयों की आधारभूत संरचना को दुरुस्त कर भौतिक संसाधनों से युक्त किया जा रहा है।वहीं इस मध्य विद्यालय की स्थिति बदहाल है। मध्य विद्यालय छतौना वर्षों से भवन, भूमि,उपस्कर व शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है।सर्व शिक्षा अभियान अथवा समग्र शिक्षा अभियान के इतने दिनों बाद भी इस पर रंग नहीं चढ़ सका। पुराने कमरे धाराशाई हो गये हैं।धराशाई भवनों पर पेड़ उग आए हैं। बच्चे बराबर दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं।
फलत:लगभग आठ कक्षाओं के साढ़े पांच सौ बच्चों के लिए मात्र पांच कमरे हैं जो उपयुक्त नहीं है। जबकि वर्ग चतुर्थ से अष्टम तक दो सेशन करने की जरूरत है।कहने को तो बारह शिक्षक हैं।इसमें दस बेसिक ग्रेड के और मात्र दो स्नातक ग्रेड के हैं।स्नातक ग्रेड में एक संस्कृत तथा दूसरे गणित व विज्ञान के हैं। हिन्दी, सामाजिक विज्ञान,अंग्रेजी आदि के शिक्षक नहीं हैं।इससे षष्ठ से अष्टम वर्ग के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई अधूरी रह जाती है।
प्रधानाध्यापक राहुल रंजन ने बताया कि छात्र-छात्राओं को मध्यान भोजन करवाने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण इस विद्यालय को भवन सहित आधारभूत संरचना उपलब्ध करवाने कि मांग की है।
