आरक्षण रोस्टर में बदलाव बदल देगा 2026 का पूरा समीकरण
गौरव कुमार AV भारत न्युज संवाददाता बखरी/बेगूसराय
बिहार विधानसभा चुनाव के शांत पड़ते ही अब बखरी अनुमंडल में पंचायत चुनाव 2026 की हलचल तेज हो गई है। सरकारी स्तर पर भी संकेत मिलने लगे हैं कि त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच कराए जा सकते हैं। विधानसभा चुनाव 2025 सम्पन्न होने के बाद पंचायती राज विभाग ने पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर प्रारंभिक गतिविधियाँ शुरू कर दी हैं। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और संभावित प्रत्याशी अभी से रणनीति बनाने में जुट गए हैं। बिहार में पंचायत चुनाव हमेशा से सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना जाता है।
गाँव की सत्ता का आधार मुखिया, सरपंच, जिला परिषद सदस्य और वार्ड सदस्य जैसे पदों पर आधारित होता है। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव खत्म होते ही अब सभी की नज़रें 2026 के पंचायत चुनाव पर टिक गई हैं। सूबे में पंचायत चुनावों का आयोजन पंचायती राज विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग की निगरानी में कराया जाता है, और इस बार कई बड़े बदलाव होने की संभावना है। सबसे बड़ा बदलाव आरक्षण रोस्टर को लेकर होने वाला है।
बिहार पंचायती राज अधिनियम 2006 और पंचायत निर्वाचन नियमावली के तहत हर 10 वर्ष में आरक्षण रोस्टर में परिवर्तन किया जाता है। 2026 के चुनाव इसी बदलाव का वर्ष है। इसका सीधा असर मुखिया, सरपंच, जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड, पंच के पद पर आरक्षण बदलने से कई पंचायतों में महिला, अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति या सामान्य कैटेगरी में फेरबदल हो सकता है। यही वजह है कि उम्मीदवार अपने-अपने पंचायत क्षेत्र के आरक्षण अनुमान को लेकर सक्रिय हो गए हैं। हालांकि आधिकारिक अधिसूचना अभी जारी नहीं हुई है, लेकिन बखरी में संभावित प्रत्याशी गांव-गांव जाकर जनसंपर्क बढ़ाने लगे हैं। ग्रामसभा से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों तक, हर मंच पर राजनीतिक गतिविधियाँ बढ़ने लगी हैं।
पंचायतों में इस बार मुकाबला काफी कड़ा और दिलचस्प होने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही की जाएगी। हालांकि यह लगभग तय माना जा रहा है कि अप्रैल–जुलाई 2026 के बीच पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। गाँव की सरकार का यह चुनाव पूरे बिहार की राजनीति में नई दिशा तय करेगा और बखरी क्षेत्र में भी इसका असर साफ तौर पर देखा जा रहा है।
