नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/ बेगूसराय
अयोध्या प्रसाद सिंह उच्चतर विद्यालय नावकोठी के खेल मैदान में श्रीमद् भागवत कथा के दौरान बनारस से पधारे कथाकार आचार्य कुंज बिहारी कश्यप ने अपने प्रवचन में भगवान कृष्ण के गोकुल से पुनः मथुरा पधार कर कंस को मार उसका उद्धार करने व माता-पिता को कारागार से मुक्त कराने की कथा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवान के नाम का भजन कर सांसारिक मोह माया से मुक्ति पा सकते हैं। नाम – जप मंत्र से मन एकाग्र होता है,चिंता -तनाव कम होते हैं,आत्मा शुद्ध होती है,सही मार्ग मिलता है और अंततः भगवान में लीन होकर साक्षात्कार का मार्ग खुलता है।क्योंकि शास्त्र कहते हैं कि भगवान और उनके नाम में कोई भेद नहीं है और नाम में असीम शक्ति होती है जो सभी पापों का नाश करती है और परम शांति देती है।
भगवान कृष्ण बाल लीला, रासलीला, गौओं का चरवाहे के रूप में लीला कर समाज के सभी तबके के लोगों का प्यारा बन गए।कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य में तीन कला,देवता में 10 कला ,भगवान राम में 12 कला और श्री कृष्णा 16 कलाओं से सुशोभित थे।भगवान कृष्ण धरती से अन्याय को समाप्त कर धर्म की स्थापना की थी।
श्री कृष्ण के पिता वासुदेव और माता देवकी कारागृह में अपने पुत्र कृष्ण के दर्शन के लिए हरि नारायण भगवान की प्रार्थना करते थे।श्री कृष्णा अपने माता- पिता की आंतरिक पुकार सुनकर गोकुल से पुनः मथुरा पधारते हैं।बाल लीला और रासलीला के बाद धरती पर से अत्याचारियों को मार कर भय और आतंक के साम्राज्य को सदा के लिए समाप्त कर दिया।
उन्होंने अरिष्टासुर और मामा कंस का वध कर अपने माता-पिता को कारागृह से मुक्त कराया।मामा कंस के पाप को समाप्त कर उसे उद्धार किया। इस दृश्य को देखकर सारे मथुरा वासी आनंदित हो गए।गोकुल से मथुरा तक के सारे राजा और प्रजा सब मिलकर भगवान को पंचामृत से अभिषेक किया।
इस शुभ अवसर पर सारे देवी देवता पुष्प वर्षा किए।सुजीत कुमार भारती, रामानुज दास,प्रभात कुमार, सिकंदर कुमार,राम प्रकाश सिंह ने हारमोनियम,तबला और अन्य वाद्य यंत्रों के द्वारा भक्तिमय गीत- संगीत से वातावरण को गूंजायमान बना दिया।
