ब्यूरो बेगूसराय
बखरी प्रखंड के सलौना स्थित ऐतिहासिक रामजानकी ठाकुरबाड़ी परिसर से प्राप्त दो प्राचीन सिंह प्रतिमाओं को सुरक्षित संरक्षण के लिए बेगूसराय संग्रहालय भेज दिया गया है। इन प्रतिमाओं को जिले की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक धरोहर माना जा रहा है।
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी-सह-सहायक संग्रहालयाध्यक्ष श्याम कुमार सहनी ने बताया कि दोनों सिंह प्रतिमाएं लगभग 250 से 300 वर्ष या उससे भी अधिक पुरानी प्रतीत होती हैं। माना जाता है कि इनका संबंध रामजानकी ठाकुरबाड़ी के निर्माण काल से है। यह ठाकुरबाड़ी मुगल काल के उत्तरार्ध में निर्मित एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं स्थापत्य धरोहर है, जो लाल पत्थरों पर की गई उत्कृष्ट शिल्पकला और बारीक नक्काशी के लिए जानी जाती है।

उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम मिशन के तहत पांडुलिपि संरक्षण एवं सांस्कृतिक धरोहरों के दस्तावेजीकरण के क्रम में रामजानकी ठाकुरबाड़ी का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान परिसर में एक सिंह प्रतिमा क्षतिग्रस्त एवं उपेक्षित अवस्था में मिली। प्रारंभिक अध्ययन में यह जानकारी सामने आई कि यह प्रतिमा मंदिर के शीर्ष भाग पर स्थापित दो सिंह प्रतिमाओं में से एक थी।
इसके बाद परिसर में विस्तृत खोजबीन की गई। खोज के दौरान दूसरी सिंह प्रतिमा भी झाड़ियों और मिट्टी के नीचे दबी हुई अवस्था में बरामद हुई। दोनों प्रतिमाओं को सावधानीपूर्वक बाहर निकालकर सुरक्षित रूप से बेगूसराय संग्रहालय पहुंचाया गया।
संग्रहालय प्रशासन ने बताया कि प्रतिमाओं का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, प्रलेखन और रखरखाव किया जाएगा। साथ ही इन्हें संग्रहालय की प्रदर्शनी दीर्घा में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि विद्यार्थी, शोधार्थी, इतिहासकार एवं आम नागरिक जिले की इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर को करीब से देख और समझ सकें।
कला एवं संस्कृति विभाग ने इसे बेगूसराय जिले की ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि इन दुर्लभ प्रतिमाओं के संरक्षण से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी।
