अशोक कुमार ठाकुर AV भारत न्यूज संवाददाता
ग्राम कचहरी सचिवों ने तीन हजार रुपया वेतन वृद्धि पर चिंता जताई, कहा सरकार पुनः करे विचार।
तीन हजार रुपया इस महंगाई दौड़ में मनरेगा के मजदूरों की मजदूरी से भी कम है ।
तेघड़ा में ग्राम कचहरी संघ की बैठक प्रखंड अध्यक्ष सोनिया कुमारी की अध्यक्षता एवं अनिल कुमार के संयोजन में हुआ। कचहरी सचिवों ने कहा कि वे लोग वर्ष 2007 से ग्राम कचहरी के कार्य प्रत्येक पंचायत में संधारित करते आ रहे हें, जिससे जनता को सुलभ न्याय मिलता आ रहा है। सचिव अपने कर्तव्यों का ईमानदारी पूर्वक पालन करते हुए स्थानीय स्तर पर मामलों का निष्पादन करते आ रहे हैं। यही कारण है कि न्यायालय में मुकदमों की संख्या में कमी आई है। पूरे बिहार में लाखों मामलों का निष्पादन हुआ है और व्यवहार एवं उच्च न्यायालयों के बोझ को कम किया है। लेकिन पिछले 18 वर्षों से जनता के साथ न्याय करने वाले कचहरी सचिवों के साथ सरकार अन्याय कर रही है।

दो सितंबर 2025 को तीन हजार रुपये की वृद्धि हुई है, वह भी दस वर्ष बाद नौ हजार रुपये निर्धारित किया गया है, जो महंगाई के इस दौड़ में मनरेगा के मजदूरों की मजदूरी एवं सरकार द्वारा निर्धारित की गई न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। इससे कचहरी सचिवों में काफी नाराजगी और आक्रोश है। कचहरी सचिवों ने सरकार से पुनर्विचार करने का आग्रह करते हुए कहा कि कम से कम न्यूनतम मजदूरी के अनुसार 18 वर्षों की सेवा अनुभव का लाभ तथा राज्यकर्मी का दर्जा देने का काम सरकार करें। बैठक में सदस्यों ने मुख्यमंत्री एवं पंचायती राज मंत्री से पुनः मानदेय बढ़ोतरी पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर महंगाई के दौड़ में सम्मान जनक मानदेय बढ़ाने की मांग की है। सदस्यों ने कहा कि सम्मानजनक मानदेय में वृद्धि नहीं हुई तो ग्राम कचहरी सचिव कार्यों को पूर्णतया बंद कर आंदोलन करने को बाध्य होंगे। मौके पर अध्यक्ष सोनिया कुमारी, बरौनी तीन के ग्राम कचहरी सचिव अनिल कुमार, बरौनी एक की कुमारी पूनम, निपनियां मघुरापुर से पार्वती कुमारी, पिपरा दोदराज से हेमलता कुमारी, धनकौल से प्रतिमा कुमारी, गौर एक से पार्वती कुमारी समेत विभिन्न ग्राम कचहरी सचिव मौजूद थे।
