नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
भैयादूज का त्योहार पूरे विधि विधान के साथ मनाया गया। बहनों ने भाई के माथे पर तिलक लगाकर दीर्घायु होने की मंगल कामना की। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व भैया दूज प्रखंड क्षेत्र में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
भाई-बहन के अटूट प्रेम, आस्था व विश्वास को दर्शाने वाले भैया दूज के इस पर्व पर बहनों ने सुबह से ही तैयारी शुरू कर दी थी। यह पर्व भारतीय संस्कृति की अटूट धरोहर के रूप में भी जाना जाता है। यह भाई और बहन के बीच अटूट रिश्ते को दर्शाता है। बहनों ने अपने भाई के सुख समृद्धि के लिए उनकी हथेलियों की पूजा की। बहनें उपवास रखकर भाई की मंगल कामना करती हैं।
भाई दूज को ‘यम द्वितीया’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसका संबंध यमराज और उनकी बहन यमुनाजी की कथा से जुड़ा है। प्राचीन मान्यता के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुनाजी के घर उनके सम्मान और स्नेह का आदर करने गए थे। यमुनाजी ने उन्हें तिलक किया, आरती उतारी और भोजन कराकर अपने प्रेम और सेवा का भाव दिखाया।
इस पर यमराज ने वचन दिया कि जो भाई अपनी बहन को इस दिन बुलाकर तिलक और भोजन कराएगा, उसकी बहन हमेशा सुरक्षित, सुखी और समृद्ध रहेगी। इस वजह से भाई दूज को यम द्वितीया कहा गया। भाई भी इस अवसर पर बहन के प्रति अपने प्रेम और सुरक्षा का वचन देते हैं और उसे उपहार देते हैं।
रक्षाबंधन और भाई दूज दोनों भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को मानते हैं, लेकिन रक्षाबंधन भाई की जिम्मेदारी और सुरक्षा पर केंद्रित है, जबकि भाई दूज बहन के स्नेह और सेवा की भावना को उजागर करता है।
