नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता बेगूसराय
एक ओर बिहार सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन्हीं योजनाओं को धरातल पर लागू करने वाले संविदा एवं मानदेय आधारित कर्मी लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
नावकोठी प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से जुड़े कर्मियों ने बताया कि उन्हें पिछले सात माह से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है। इसके कारण परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, बिजली बिल, इलाज और अन्य जरूरी खर्चों का प्रबंधन करना लगातार कठिन होता जा रहा है।
कर्मियों ने बताया कि मानदेय नहीं मिलने का असर योजना के क्रियान्वयन पर भी पड़ रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्हें लगातार क्षेत्र भ्रमण, लाभुकों का सत्यापन, जियो टैगिंग, ऑनलाइन प्रतिवेदन और अन्य प्रशासनिक कार्य करने पड़ रहे हैं। कई बार उन्हें अपने निजी खर्च से भी सरकारी कार्यों का निर्वहन करना पड़ता है।
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना को सफल बनाने में उनकी अहम भूमिका है, लेकिन सात माह से मानदेय लंबित रहने के कारण उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। समय पर भुगतान होने से वे अधिक उत्साह और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
आवास पर्यवेक्षक मुकेश कुमार, कार्यपालक सहायक सुरेश कुमार ठाकुर, प्रखंड लेखापाल दीनानाथ कुमार तथा आवास सहायक अमन कुमार, आलोक कुमार, सौरभ कुमार, रामप्रवेश कुमार, प्रकाश कुमार और ललन कुमार ने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर लंबित मानदेय का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान होने से उनकी आर्थिक समस्याएं कम होंगी और सरकार की योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को भी गति मिलेगी।


