- विजय भारती ब्यूरो AV भारत न्युज बेगुसराय
2020 में सुरेंद्र मेहता ने पलट दी बाजी
बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र किसी विशेष दल के प्रति हमेशा वफादार नहीं रहा। लेकिन 1972 के बाद यह सीट 1985 व 2020 को छोड़कर यादवों के हवाले रहा। 1972 ,1977 तथा 1980 का चुनाव कांग्रेस व 1985,1990 तथा 1995 का चुनाव भाकपा ने लगातार तीन तीन बार जीतने का काम जरूर किया है।
मालूम हो कि बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का गठन 1951 में हुआ था तब एक दलीय कांग्रेस का एक क्षत्र प्रभाव होने के कारण यहां से कांग्रेस प्रत्याशी मिठन चौधरी विधायक बने थे अर्थात बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र का प्रथम विधायक बनने का गौरव मिठन चौधरी को प्राप्त हुआ था।
उसके बाद कांग्रेस ने अगले चुनाव 1957 में इस विधानसभा क्षेत्र से विधायक के लिए बैद्यनाथ प्रसाद सिंह पर विश्वास जताया तथा वे इस विधानसभा क्षेत्र के दूसरे कांग्रेसी विधायक बने।1962 में यहां की जनता कांग्रेस को झटका दे दिया तथा संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी पर विश्वास जताते हुए गिरीश कुमारी सिंह को वोट देकर विधायक बना दिया लेकिन अगले चुनाव जो 1967 में हुआ था में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी ने अपना उम्मीदवार बदल दिया तथा वीपी सिंह को मैदान में उतारा।चार कोणीय कड़े मुकाबले में विपी सिंह विधायक बने तथा इस बार भी संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी का बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र पर कब्जा बरकरार रहा।
उसके बाद कांग्रेस की इस क्षेत्र में पुनः 1972 में वापसी हुई तथा कांग्रेस के युवा नेता रामदेव राय जो पहली बार चुनाव लड़े थे यहां के विधायक बने। इसके बाद वे लगातार 1977 व 1980 का चुनाव जीत कर लगातार तीसरी बार यहां का विधायक बनने का रिकॉर्ड कायम किया।1985 के चुनाव में वे बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से अपने जगह एक डमी उम्मीदवार प्रेमलता देवी को कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार दिया कारण वे समस्तीपुर जिला से सांसद बन चुके थे। उन्होंने समस्तीपुर लोकसभा चुनाव क्षेत्र में वरिष्ठ सामाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर को शिकस्त देकर सांसद बने थे।उस समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के उपरांत कांग्रेस की लहर चल रही थी तथा उसी लहर में बलिया लोकसभा क्षेत्र से श्रीमती चंद्रभानु देवी भी सांसद बनी थी।
लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस लहर के बावजूद प्रेमलता चुनाव हार गई तथा भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के समर्पित, निष्ठावान, जुझारू नेता अयोध्या प्रसाद सिंह चुनाव जीत गए।उस समय अयोध्या प्रसाद सिंह को कांग्रेस के समर्थकों ने भी वोट कर विधायक बनाया था। फिर तो यह सीट कांग्रेस के कब्जे से निकल कर भाकपा के कब्जे में चला गया। उसके बाद लगातार तीन चुनाव इस पर भाकपा का कब्जा रहा तब लोग इस क्षेत्र को लेनिनग्राड कह कर पुकारने लगे थे। लेकिन 1990 में भाकपा ने इस क्षेत्र से अवधेश कुमार राय को उम्मीदवार बनाया था तथा वही 1990 तथा 1995 में चुनाव जीते थे।
अयोध्या प्रसाद सिंह को भाकपा ने टिकट नहीं दिया था इसलिए वे भाकपा छोड़ कर समता पार्टी का दामन थाम लिया था। समता पार्टी से वे 1990 में भाकपा के खिलाफ भी चुनाव लड़े थे। भाकपा को राजद का समर्थन मिला था। लेकिन 2000 ईस्वी में बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से राजद ने अपना उम्मीदवार उत्तम कुमार यादव को बनाया। तथा आशा के विपरित परिणाम आये।उत्तम कुमार यादव कांग्रेस, भाकपा,समता, लोजपा सहित सभी उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए बाजी मार ली तथा विधायक बने तब लोगों को आश्चर्य भी हुआ था कि एक साधारण आदमी उत्तम कुमार यादव विधायक कैसे बन गये । लोगों का कहना था कि वे चाय बेचते थे।
2005 में कांग्रेस रामदेव राय को टिकट किसी कारण वश नहीं दे सकी तब रामदेव राय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा जिसमें भाजपा का सहयोग रामदेव राय को मिला तथा वे चुनाव जीते। चुनाव जीत कर वे फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए तथा भाजपा कार्यकर्ता हाथ मलते रह गए। फिर 2010 के चुनाव में वे कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ें लेकिन भाकपा उम्मीदवार अवधेश कुमार राय के हाथों उन्हें शिकस्त मिली। एक बार फिर से अवधेश कुमार राय बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने।इस बार कांग्रेस के रामदेव राय तीसरे स्थान पर रहे। दूसरे स्थान पर निर्दलीय उम्मीदवार अरविंद कुमार सिंह रहे।उसके बाद 2015 के चुनाव में भाकपा के अवधेश कुमार राय तीसरे स्थान पर रहे।इस बार कांग्रेस के रामदेव राय ने लोजपा के उम्मीदवार अरविंद कुमार सिंह को पराजित कर विधायक बने थे।
2020 के चुनाव में भाजपा ने बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से सुरेंद्र मेहता पर अपना दाव आजमाया तथा वे तृकोणिय कड़े मुकाबले में कम अंतर से अपना सीट निकालने में सफल रहे तथा भाजपा का पहला वार विधायक इस क्षेत्र से बना, जबकि भाजपा इस क्षेत्र से 1985 से ही लगातार प्रयास कर रही थी।1985 में भाजपा से प्रो अमरेश शांडिल्य चुनाव लड़े थे तब उन्होंने चुनावी सभा में लोगों से कहा था कि मैं चुनाव जीतने नहीं, लोगों को जगाने आया हूं। भाजपा जनसंघ का परिवर्तित रूप है।जनसंघ से 1967 में धनेश्वर प्रसाद चुनाव लड़े थे तथा उन्होंने भी यहां के आमलोगों को अपने सम्बोधन में कहा था कि मैं चुनाव जीतने नहीं बल्कि यहां के लोगों के ह्रदय में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने आया हूं।
कुछ भी हो वर्षों संघर्ष के बाद 2020 में भाजपा इस क्षेत्र में सफल हुआ। उक्त चुनाव में क्षेत्र के कूल 286056 में 180247 मतदाताओं ने मतदान किया। जिसमें सुरेंद्र मेहता को 54738 , अवधेश कुमार राय को 54254 , निर्दलीय शिवप्रकाश ग़रीबदास को 39878 तथा इन्द्रा देवी को 9704 मत मिले थे। सुरेंद्र मेहता मात्र 484 मतों के मामुली अंतर से चुनाव जीते थे।उक्त चुनाव में कूल 18 प्रत्याशी मैदान में थे। बावजूद इसके उक्त चुनाव में क्षेत्र के कूल 945 मतदाताओं ने सभी नेताओं को खारिज करते हुए नोटा बटन दबाया था।1972 से लगातार इस क्षेत्र पर ज्यादातर यादव समाज ही विधायक रहे। इस बीच 1985 में अयोध्या प्रसाद सिंह तथा 2020 में सुरेंद्र मेहता गैर यादव चुनाव जीत कर विधायक बने थे।
