नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
अपनी मुक्ति प्राप्ति के लिए श्रीमद् भागवत कथा अनमोल रत्न है। इसके श्रवण से जन्म जन्मांतर का पाप और दुख समाप्त हो जाता है।
उक्त बातें अयोध्या प्रसाद सिंह उच्चतर विद्यालय नावकोठी के खेल मैदान में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन सोमवार को बनारस से पधारे कथाकार आचार्य श्री कुंज बिहारी कश्यप ने कहीं।श्रीमद् भागवत कथा राजा परीक्षित की मुक्ति के लिए सुनाई जा रही थी।मां भक्ति की संतान ज्ञान और वैराग्य है।ज्ञान और तप के बल पर मानव वृद्धावस्था छोड़कर यौवनावस्था प्राप्त कर सकते हैं। भागवत का अर्ध श्लोक श्रवण करने से जीवन धन्य धान्य हो जाता है।
कलयुग में केवल भगवान का नाम लेना ही एकमात्र आधार है। भागवत कथा के पाठ करने और श्रवण करने से मनुष्य के अंधकार रूपी ज्ञान खुल जाते हैं। मनुष्य तन पाने के लिए देवता भी ललाइत रहते हैं।कथा में बिहारी झा, सौरभ कुमार,पिंटू कुमार,यजमान महेंद्र सिंह,सुबोध कुमार एवं और काफी संख्या में महिलाएं वह पुरुष श्रीमद् भागवत कथा का रसपान किया।


