गौरव कुमार AV भारत न्युज संवाददाता बखरी/संवाददाता
ईरान–इजरायल के बीच बढ़ते टकराव और अमेरिका की सक्रियता के बाद पश्चिम एशिया का माहौल लगातार संवेदनशील बना हुआ है। इसका सीधा असर उन भारतीय परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके बेटे और परिजन खाड़ी देशों में नौकरी कर रहे हैं। बखरी नगर और आसपास के इलाकों के कई युवक दुबई, शारजाह, मस्कट और दोहा में कार्यरत हैं। हालिया घटनाक्रम के बाद यहां उनके घरों में बेचैनी साफ देखी जा रही है।
परिवारों का कहना है कि दिनभर मोबाइल पर अंतरराष्ट्रीय खबरें देखने के बाद मन में तरह-तरह की आशंकाएं उठती हैं। हालांकि वहां मौजूद युवक लगातार संपर्क में हैं और स्थिति को सामान्य बता रहे हैं, फिर भी सीमित जानकारी के कारण चिंता कम नहीं हो पा रही।
वीडियो कॉल से मिल रही तसल्ली
दुबई में होटल प्रबंधन से जुड़े एक युवक ने वीडियो कॉल पर बताया कि सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं और आम जनजीवन फिलहाल व्यवस्थित है। “काम पर आना-जाना जारी है, लेकिन हम लोग बेवजह बाहर नहीं निकल रहे,” उन्होंने कहा। घरवालों के लिए यही वीडियो कॉल सबसे बड़ी राहत बन गई है।
कंपनियों ने बढ़ाई निगरानी
ओमान और कतर में कार्यरत युवाओं के परिजनों के अनुसार, कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं। आपात स्थिति में क्या करना है, किससे संपर्क करना है—इसकी जानकारी साझा की गई है। कुछ स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा जांच भी शुरू की गई है।
रोजगार और सुरक्षा के बीच संतुलन
प्रवासी युवाओं के परिवार दोहरी स्थिति में हैं। एक ओर विदेश की नौकरी से घर का खर्च चलता है, बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियां पूरी होती हैं; दूसरी ओर मौजूदा तनाव ने असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। एक अभिभावक ने कहा, “हम चाहते हैं कि बच्चे सुरक्षित रहें। कमाई बाद में भी हो सकती है, जान सबसे जरूरी है।”
सरकारी सहायता की उम्मीद
स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि यदि हालात गंभीर होते हैं तो सरकार समय रहते उचित कदम उठाएगी। फिलहाल सभी युवक सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर बनी हुई है।
तनावपूर्ण माहौल के बीच बखरी के कई घरों में दुआ और धैर्य ही सहारा है। परिवारों को भरोसा है कि स्थिति जल्द सामान्य होगी और उनके अपने सुरक्षित लौटकर फिर से घर की चौखट पर मुस्कुराते नजर आएंगे।
