नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नावकोठी प्रखण्ड क्षेत्र अन्तर्गत पहसारा मुखिया जी चौक से पश्चिम मध्य विद्यालय के सामने पंचमुखी हनुमत रक्षा कवच महायज्ञ के चौथे दिन अयोध्या धाम के तपोमूर्ति संत परमपूज्य दिव्यानंद जी महाराज के सानिध्य में चल रहे यज्ञ में श्रीमद्भागवत कथा वाचक आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज ने चौथे दिन कहा कि श्रीमद्भागवत में मंगलाचरण में सत्य की वंदना की गई है।सत्य को हर व्यक्ति मानता है इसलिए मंगलाचरण में “सत्यम परम धीमहि” आया।
महाराज जी ने महाभारत की कथा सुनाई जिसमें अश्वत्थामा द्वारा द्रोपदी के पांच पुत्रों की हत्या कर दी जाती है।आगे महाराज जी बताया कि जब भगवान कृष्ण की हस्तिनापुर से विदाई होता है,उसी समय भगवान की बुआ कुंती ने भगवान से विपत्ति का वरदान मांगा।बहुत ही भाव पूर्ण भजन हुआ “दुख और मिले भगवान तुम दूर नहीं जाना सर्वस्व तुम्ही मेरे सर्वत्र नजर आना”।
दुख में हमेशा भगवान की याद आती और सुख में व्यक्ति भगवान को भूल जाता है।इसलिए कुंती मैया ने भगवान से दुख मांगा जिससे भगवान का स्मरण हमेशा बनी रहे। इस भावपूर्ण प्रसंग सुनकर सभी श्रोताओं की आंखे नम हो गई। कथा के बीच-बीच में संगीतमय भजनों का आनंद श्रोता लेते रहे।
इस दौरान श्याम नंदन सिंह,रामनाथ उर्फ बुडुल सिंह,शिवम वत्स,रणवीर कुमार सिंह,चंदन कुमार, कन्हैया कुमार,मुकेश सिंह,अमित कुमार फूचो,टुन्नी सिंह,उपेंद्र सिंह,दरेश सिंह, कौशल सिंह,राहुल, रामू,राकेश,रामानंद सहित सैंकड़ों की संख्या में भागवत प्रेमी श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए।
