नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगुसराय
बखरी प्रखण्ड क्षेत्र स्थित सलौना का बड़ी ठाकुरबाड़ी ऐतिहासिक प्राचीन मंदिर जो अपनी बदहाली और उपेक्षा पर आंसू बहा रही है। लगभग 250 से 300 वर्ष पुरानी यह लाल पत्थरों से निर्मित ऐतिहासिक धरोहर प्रशासनिक उदासीनता के कारण जर्जर हो चुकी है।स्थानीय लोग और इतिहास प्रेमी अब इस प्राचीन सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण व जीर्णोद्धार की पुरजोर मांग कर रहे हैं।इतिहास: लगभग 250 से 300 वर्ष पुरानी यह ठाकुरबाड़ी मुगल काल में स्थापित की गई थी।
कलाकृति: इसके निर्माण में कीमती लाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है और इसकी नक्काशी उड़ीसा के पुरी मंदिर और औरंगाबाद के सूर्य मंदिर जैसी आकर्षक है।वर्तमान स्थिति: वर्षों से उचित रखरखाव और मरम्मत न होने के कारण मंदिर परिसर की दीवारें जर्जर हो चुकी हैं और यह स्थल उपेक्षा का शिकार है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जल्द ठोस कदम उठाते हुए इस ऐतिहासिक परिसर का सौंदर्यीकरण करना चाहिए।धार्मिक न्यास परिषद: स्थानीय स्तर पर इसे धार्मिक न्यास परिषद में शामिल कराने और इसे विशेष पहचान दिलाने की मुहिम चल रही है।
समाजसेवी डॉ रमन झा ने बताया कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजना न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि यह क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को बचाने का भी मामला है।ऐसी ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के लिए एक नायाब तरीका अपनाया गया,जिसमें समाजसेवी व चर्चित डॉ रमन झा के नेतृत्व में रविवार 24 मई 20 26 को मीडिया काॅन्कलेव कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जिसमें मिथिलांचल एवं कोसी क्षेत्र के सैकड़ों यूट्यूबर एवं पत्रकार मौजूद होकर इस प्राचीन ठाकुरबाड़ी मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर आवाज बुलंद कर सरकार तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया।
जानकारी के अनुसार मंदिर न्यास परिषद में पूर्व से ही निबंधित है। तत्कालीन डीएम तुषार सिंगला ने न्यास बोर्ड में पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी।अब प्रशासन इसी आधार पर नई प्रबंधन समिति गठित करने की तैयारी में है,ताकि अतिक्रमण हटे और मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हो सके।
