गोपल्लव झा AV भारत न्युज संवाददाता वीरपुर/बेगुसराय
वीरपुर। जी हां, आपने सही सुना है कि जहां अंधेर नगरी होती है, वहां का राजा चौपट ही हुआ करता है। कुछ ऐसा ही इन दिनों वीरपुर बाजार में देखने को मिल रहा है। ऐसा यहां के दुकानदारों और ग्रामीणों का कहना है।
मामला वीरपुर सब्जी मार्केट से ईटवा गोसाईं चौक तक बने नाला की सफाई, जीर्णोद्धार और उसके ऊपर ढक्कन लगाने के कार्य से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस काम में नियम-कायदे को ताक पर रखकर कार्य कराया जा रहा है।

लोगों का कहना है कि जब किसी सरकारी योजना का काम शुरू किया जाता है तो कार्यस्थल पर योजना से संबंधित अनुमानित राशि, स्वीकृत राशि, काम पूरा करने की समय-सीमा, योजना का नाम और इस्तेमाल होने वाले मटेरियल आदि की जानकारी वाला बोर्ड लगाया जाता है। लेकिन वीरपुर बाजार में चल रहे इस कार्य में अब तक ऐसा कोई बोर्ड नजर नहीं आ रहा है।
वीरपुर बाजार के दुकानदारों, ग्रामीणों और बाजार में रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं खरीदने आने वाले लोगों ने बताया कि इस प्रखंड में किस तरह के जेई, अभिकर्ता और जनप्रतिनिधि हैं, यह समझ से परे है। लोगों का कहना है कि कहीं सड़क से करीब छह इंच तो कहीं 12 इंच तक ऊंचा नाला बना दिया गया है। ऐसे में भगवान ही जाने कि बारिश के समय सड़क का पानी नाला में जाएगा या नाला का पानी सड़क पर आएगा।

ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब जल निकासी की समुचित व्यवस्था ही नहीं की जा रही है तो फिर इस तरह के नाला निर्माण का क्या मतलब है। लोगों का आरोप है कि नाला निर्माण के नाम पर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसमें जेई, जनप्रतिनिधि एवं संबंधित पदाधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच होनी चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्हें जानकारी मिल रही है कि 26 लाख रुपये से अधिक की राशि से यह काम कराया जा रहा है। लोगों का कहना है कि इस कार्य को शुरू करने से पहले ग्राम सभा या वार्ड सदस्यों की बैठक हुई या नहीं, इसकी भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, कार्य की गुणवत्ता की जांच करने तथा योजना से संबंधित सभी जानकारी कार्यस्थल पर सार्वजनिक करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि नाला निर्माण का उद्देश्य जल निकासी की समस्या दूर करना है तो निर्माण ऐसा होना चाहिए जिससे भविष्य में लोगों को जलजमाव की समस्या से राहत मिल सके, न कि परेशानी और बढ़े।


