नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
नावकोठी प्रखंड क्षेत्र के सदर पंचायत स्थित होटल द्वारका पैलेस में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्री गुरु पूजा महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रवचन करते हुए संस्थान के संस्थापक एवं संचालक दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज के शिष्य स्वामी श्री धनंजयानंद जी ने कहा कि पूर्ण गुरु की पहचान ब्रह्मज्ञान है और गुरु की शरण में जाकर ही जीवात्मा का कल्याण संभव है।
उन्होंने महाराष्ट्र में जन्मे भक्त नामदेव के जीवन चरित्र को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भक्त नामदेव की भक्ति और प्रेम से प्रसन्न होकर भगवान कई बार उनके सामने प्रकट होते थे। इसके बावजूद भगवान ने स्वयं नामदेव को समझाया कि यदि वे उनके वास्तविक स्वरूप को जानना चाहते हैं तो गुरु विसोबा खेचर की शरण में जाएं। स्वामी धनंजयानंद ने कहा कि गुरु की शरणागति ही जीवात्मा के कल्याण का मार्ग है।
वहीं, साध्वी विदुषी सुमति भारती जी ने कहा कि सामाजिक, नैतिक और बौद्धिक प्रगति के लिए प्रत्येक व्यक्ति को गुरु की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि आज मनुष्य पहले की अपेक्षा अधिक सुविधाओं और साधनों से संपन्न है, लेकिन सुख और संतोष के मामले में काफी पीछे होता जा रहा है। मानवीय गरिमा को गिराने वाला आचरण और मर्यादाओं को तोड़ती परंपराएं व्यक्ति एवं परिवार को संवेदनहीन बना रही हैं। इसके कारण लोग मानसिक रूप से परेशान और अवसादग्रस्त हो रहे हैं।
उन्होंने रामचरितमानस और गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों ही हमें गुरु की शरण में जाने का संदेश देते हैं। अर्जुन भी जब मोह और मानसिक द्वंद्व से परेशान थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें ज्ञान देकर सही मार्ग दिखाया।
साध्वी सुमति भारती ने कहा कि गुरु शिष्य को नया जन्म देने का कार्य करते हैं, इसलिए उन्हें ब्रह्मा के समान माना गया है। गुरु शिष्य की रक्षा करते हैं, इसलिए वे विष्णु के समान हैं और शिष्य के अवगुणों का नाश करते हैं, इसलिए शिव के समान हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे पूर्ण गुरु की तलाश करने का आह्वान किया, जो शास्त्र सम्मत होने के साथ तत्वदर्शी भी हों।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर साध्वी सरिता भारती, गायक पवन, पैड पर राहुल एवं तबला पर रामचन्द्र मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।


