नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता बेगूसराय
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि एवं कर्मभूमि बेगूसराय में उनकी स्मृति को चिरस्थायी बनाने और क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना का सपना अब आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। लंबे समय से चली आ रही मांग, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के प्रयास और बिहार सरकार के सकारात्मक रुख के बाद जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के लिए 15 एकड़ भूमि चिह्नित कर उच्च शिक्षा विभाग, बिहार सरकार को प्रतिवेदन भेज दिया है।
निवर्तमान समाहर्त्ता बेगूसराय श्रीकांत शास्त्री की ओर से सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, बिहार सरकार को पत्रांक 1854/रा०, दिनांक 19 अगस्त 2026 के माध्यम से भूमि संबंधी प्रतिवेदन भेजा गया है। अंचल अधिकारी, बरौनी के पत्रांक 3202, दिनांक 17 अगस्त 2026 के अनुसार प्रस्तावित भूमि मौजा मल्हीपुर, थाना संख्या 503, खाता संख्या 261 और खेसरा संख्या 890 में स्थित है। भूमि का कुल रकबा 15 एकड़ है और इसकी प्रकृति गैर-मजरूआ खास, बिहार सरकार की भूमि बताई गई है।
बताया गया कि 19 जुलाई को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के बेगूसराय आगमन के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने दिनकर की स्मृति में बेगूसराय में विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग रखी थी। इसके बाद भी उन्होंने कई मौकों पर मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर इस मांग को प्रमुखता से उठाया। संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के स्तर पर लगातार समन्वय एवं पहल के बाद विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के लिए भूमि चिह्नित करने और उच्च शिक्षा विभाग को प्रतिवेदन भेजने की प्रक्रिया पूरी हुई है।
भूमि चिह्नित होने को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बेगूसराय की शैक्षणिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय की स्थापना से जिले और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
स्थायी परिसर का निर्माण पूरा होने तक विश्वविद्यालय का शैक्षणिक संचालन डाइट, शाहपुर के भवन से शुरू करने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की स्थापना को केवल घोषणा तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को जल्द से जल्द शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध कराना है।
जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तावित भूमि का नजरी नक्शा संलग्न कर प्रतिवेदन उच्च शिक्षा विभाग को भेज दिया गया है। उच्च शिक्षा विभाग से विधिवत अधियाचना प्राप्त होने के बाद नियमानुसार भूमि हस्तांतरण और निर्माण से संबंधित आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
भूमि का चिह्नांकन और उच्च शिक्षा विभाग को प्रतिवेदन भेजा जाना दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अब लोगों की नजर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के निर्माण पर है। दिनकर की धरती पर उच्च शिक्षा का एक नया केंद्र स्थापित होना क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।


