- विजय भारती ब्यूरो AV भारत न्यूज बेगूसराय ।
शनिवार को अनन्त चतुर्दशी पुजा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने बंधवाया अनन्त सूत्र। उक्त पुजा भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालुओं के द्वारा व्रत रखकर तीनों लोकों के स्वामी भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का विधान है। यह इसलिए भी खास हो जाता है, की इस दिन दस दिवसीय भगवान श्री गणेश पूजा का समापन हो जाता है। इस दिन श्रद्धालु नमक का प्रयोग नहीं करते हैं तथा फलाहार करते हैं। अनन्त चतुर्दशी पुजा में शामिल किए गए अनंत सूत्र श्रद्वालु सुख समृद्धि तथा रक्षा की कामना से बांधते हैं।

पांडवों से जुड़ी है कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाभारत काल में जब पांडव अपना सबकूछ जुए में हार कर विरान जंगल में भटक रहे थे। उस दौरान उन्हें बहुत कष्ट भोगना पड़ा। कष्टों से वे लोग टुट चुके थे तब एक दिन भगवान श्रीकृष्ण महाराज युधिष्ठिर से जंगल में मिलने पहुंचे। तब युधिष्ठिर ने श्रीकृष्ण से इस दुःख, कष्ट से मुक्ति व निवारण हेतु युक्ति बताने की बात कही। तब भगवान विष्णु ने युधिष्ठिर को अनन्त चतुर्दशी पुजा करने की युक्ति बताये। अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान श्री विष्णु के अनंत रुपों की पुजा आराधना करने का विधान है। इसलिए इसे अनंत चतुर्दशी पुजा के नाम से भी जाना जाता है। विभिन्न गांवों में स्थित मठ मंदिरों में भगवान श्री विष्णु की पुजा की गई। साथ ही महिला और पुरुषों ने पूरे विधि-विधान के साथ अनंत सूत्र बांध कर परिवार के लोगों के लिए मंगल कामना की।
