नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/बेगूसराय
छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी हर्षोल्लास पूर्वक मनाई मनायी गई।कथाओं के अनुसार,भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन असुर नरकासुर का वध किया था।छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है,मुख्य दिवाली के ठीक पहले मनाई जाती है।इसे काली चतुर्दशी, रौशनी का पर्व या अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतिक भी कहा गया है।नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बना रखा था। जब भगवान श्रीकृष्ण ने उसका संहार किया,तो समस्त लोकों में हर्ष छा गया और दीप जलाकर इस विजय का उत्सव मनाया गया।तभी से इस दिन को नरक चतुर्दशी या छोटी दिवाली के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई।छोटी दिवाली का दिन शुद्धिकरण और प्रकाश के स्वागत का प्रतीक है।कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अर्थात नरक चतुर्दशी पर यम का पूजन कर यमदीप निकालने की परंपरा सदियों पुरानी रही है।मृत्यु के देवता यमराज का पूजन कर यमदीप घर से जलते हुए बाहर निकाल कर जलाया गया। मान्यतानुसार नरक चतुर्दशी छोटी दिवाली के दिन यम का पूजन करने से अकाल मृत्यु एवं नर्क से छुटकारा मिलता है।
