नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता
लोक आस्था का महापर्व छठ के दूसरे दिन खरना के साथ शुरू हुई 36 घंटे का निर्जला व्रत।छठ घाट सज गए हैं,घरों में पूजा की तैयारी जोरों पर है। महिलाएं व्रत रखकर सूर्य देव से अपने परिवार की भलाई की प्रार्थना करेंगी।खरना का यह दिन छठ के सबसे पवित्र और भावनात्मक दिनों में से एक है।खरना को आत्मशुद्धि का दिन कहा जाता है। यह दिन संयम,तपस्या और भक्ति का प्रतीक है।छठ के दूसरे दिन खरना के रूप में मनाया गया। यह पर्व बहुत ही श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में व्रती (छठ करने वाली महिलाएं) अपने परिवार की सुख-शांति और संतान की लंबी उम्र के लिए सूर्य देव और छठी माई की पूजा करती हैं। खरना का मतलब होता है—मन,शरीर और आत्मा की शुद्धि।इस दिन का उपवास बहुत कठिन माना जाता है क्योंकि पूरे दिन बिना पानी पिए रहना होता है।शाम को व्रती स्नान करके साफ कपड़े पहनकर केले के पत्ते पर खरना के प्रसाद में गुड़ की खीर,रोटी और केला से पूजा अर्चना की।व्रती के प्रसाद ग्रहण करने के बाद घर के सभी सदस्यों ने प्रसाद ग्रहण किया। खरना के साथ ही छठ व्रती महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला व्रत की शुरुआत हो गई।
