गिरी हुई धान की फसल को वारिस से बड़ी नुकसान
अशोक कुमार ठाकुर AV भारत न्युज संवाददाता तेघड़ा/बेगूसराय
बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान मोंथा अबअपना असर दिखा रहा है। छठ पर्व के समापन के साथ ही मंगलवार की दोपहर से आसमान में बादल छाए रहे। बुधवार की सुबह से प्रखंड क्षेत्रों में रुक रुक कर बारिश भी हुई। जिससे मौसम का मिराज पूरी तरह बदल दिया।
किसानों की चिंता बढ़ी
रुक रुक कर बारिश होने से किसानों को नुकसान होने की आशंका बढ़ गई है। एक तरफ ऊपरी हिस्से में तैयार किया जा रहे खेतों में मटर , मक्का, आलू, दलहन, तिलहन की फसल की बुवाई पर ग्रहण लगता दिख रहा है। वहीं तापमान में गिरावट और बारिश के कारण खेतों में कटी पड़ी धान की फसल पर संकट मंडरा आ रहा है। और खेत में तैयार धान की फसल की कटाई भी प्रभावित हो रही है।

जिससे किसानों को बड़ा नुकसान होने की आशंका है। बूंदा – बांदी से फसल गीली हो गई है। जिससे किसानों को फसल खराब होने का डर सता रही है। किसानों का कहना है कि यदि बारिश जारी रही तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। वहीं अब खेतों में नमी हो जाने से समय के साथ गेहूं की बुवाई भी प्रभावित होगी। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में हुई इस बारिश ने तापमान में गिरावट दर्ज की है। इससे अब जल्द ही ठंड का एहसास होगा। मौसम के प्रभाव से 30 और 31 अक्टूबर को तेज बारिश और तूफानी हवाएं चलने की संभावना है।
अनुमंडल कृषि पदाधिकारी तेघड़ा विजय कुमार सिंह द्वारा किसानों को सलाह दी गई है कि वे इस दौरान फसलों में सिंचाई न करें और मौसम पूरी तरह साफ होने के बाद ही दवाओं का छिड़काव करें। मौसम खराब होने की स्थिति में मेघ, गर्जन और बिजली गिरने किसी संभावना बनी रहती है।
