नवीन कुमार मिश्रा AV भारत में न्युज संवाददाता नावकोठी/ बेगूसराय
बिहार राज्य सहकारिता प्रसार पदाधिकारी संघ के आह्वान पर प्रखंड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी अपने लंबित मांगों को लेकर 1 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहने का निर्णय लिया है।नावकोठी प्रखंड प्रसार पदाधिकारी अनिल कुमार चौधरी ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि राज्य संघ के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करने और अपनी वाजिब मांगों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
संवर्ग के अधिकारियों द्वारा कई बार विभाग को ज्ञापन सौंपा गया है,जिसमें उनकी समस्याओं तथा मांगों का स्पष्ट उल्लेख किया गया था।इसके बावजूद विभाग द्वारा अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई या सकारात्मक पहल नहीं की गई है।उन्होंने कहा कि विभागीय उदासीनता और अनदेखी से नाराज होकर सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को मजबूरन सामूहिक हड़ताल पर जाना पड़ रहा है।सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों की हड़ताल का सीधा असर धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया पर पड़ेगा।

धान खरीद का बड़ा हिस्सा इन्हीं अधिकारियों के समन्वय और प्रत्यक्ष निगरानी में संपन्न होता है।हड़ताल के चलते न सिर्फ धान खरीद ठप पड़ सकती है,बल्कि किसानों द्वारा अपनी उपज को व्यवस्थित तरीके से पैक्स पर बेचने में भी बाधा आएगी।इससे किसानों को बिचौलियों के हाथों कम कीमत पर धान बेचने की नौबत आ सकती है।इसके अतिरिक्त फरवरी 2026 में प्रस्तावित पैक्स चुनाव की तैयारियों पर भी हड़ताल का प्रतिकूल असर पड़ेगा।
चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करना,पैक्स स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन,निर्वाचक सूची का अद्यतन,प्रशिक्षण प्रक्रिया-ये सभी गतिविधियाँ सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों के प्रत्यक्ष सहयोग से ही संभव होती हैं।अतः उनके हड़ताल पर चले जाने से चुनावी प्रक्रिया में विलंब की संभावना बढ़ गई है।उन्होंने कहा कि धान अधिप्राप्ति में निर्दोष सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों के खिलाफ की जा रही अनुचित कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।साथ ही सहकारिता प्रसार पदाधिकारी संवर्ग को राजपत्रित करने की पुरानी मांग को तत्काल प्रभाव से मानना आवश्यक है।
इसके अलावा पदाधिकारियों के लिए वाहन उपलब्ध कराने,पैक्स स्तर पर दक्ष कर्मियों की नियुक्ति,सभी प्रखंडों में सहकार भवन की व्यवस्था तथा सहायक निबंधक पद को प्रोन्नति के माध्यम से भरने की मांग भी उनकी सूची में शामिल है।संघ का कहना है कि वर्षों से जो सुविधाएँ अन्य संवर्गों को प्राप्त हैं,वही सुविधाएं सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों को भी मिलनी चाहिए।
विभागीय कार्यों का अधिकांश बोझ सहकारिता प्रसार पदाधिकारियों पर रहता है।बावजूद इसके उनकी सेवा शर्तों, सुविधाओं और सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर कभी गंभीर पहल नहीं की गई।इससे पदाधिकारियों में गहरा असंतोष व्याप्त है। इधर धान खरीद कार्य से जुड़े किसानों के बीच चिंता बढ़ने लगी है। पैक्स अध्यक्ष रणवीर सिंह ने कहा कि यदि पैक्स पर सरकारी खरीद बाधित हुई तो किसानों को अपनी उपज औने-पौने दाम पर व्यापारियों को बेचनी पड़ेगी,जिससे उनका भारी आर्थिक नुकसान होगा।
उन्होंने कहा की एडवाइस जनरेट हो गया है।प्रखंड प्रसार पदाधिकारी के हड़ताल की वजह से हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, जिसकी वजह से किसानों को राशि भुगतान में विलंब हो रहा है।जबकि पैक्सों पर किसानों की भीड़ उमड़ रही है।
सरकार जल्द से जल्द इस पर निर्णय ले।हड़ताल को लेकर हलचल तेज हो गई है और विभागीय कार्यों पर इसका कितना व्यापक असर पड़ेगा,यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल सहकारिता प्रसार पदाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठाता,तब तक हड़ताल जारी रहेगी।
