नवीन कुमार मिश्रा AV भारत न्युज संवाददाता नावकोठी/ बेगूसराय
बेगूसराय के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जिले के बीपी स्कूल परिसर में प्रस्तावित अल्पसंख्यक छात्रावास के निर्माण को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि बीपी स्कूल लंबे समय से जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जाना जाता रहा है।
सांसद ने कहा कि यह विद्यालय किसी एक भाषा या समुदाय विशेष से जुड़ा संस्थान नहीं है। न तो यह उर्दू विद्यालय है और न ही यहाँ अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों की संख्या इतनी अधिक है कि परिसर में अलग से अल्पसंख्यक छात्रावास बनाने की आवश्यकता महसूस हो। उन्होंने कहा कि विद्यालय की महत्वपूर्ण जमीन को किसी एक समुदाय के लिए आरक्षित करना उचित नहीं है और इससे स्कूल का शैक्षणिक वातावरण भी प्रभावित हो सकता है।
गिरिराज सिंह ने यह भी आशंका जताई कि यदि स्कूल परिसर में छात्रावास का निर्माण होता है तो इससे विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध खुला मैदान और खेलकूद की व्यवस्था प्रभावित होगी। इसका असर छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि बीपी स्कूल वर्षों से जिले के विभिन्न वर्गों और पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र रहा है। ऐसे में विद्यालय की मूल संरचना और शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करने वाला कोई भी निर्णय लेने से पहले व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श होना जरूरी है।
सांसद कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले को लेकर पहले भी बेगूसराय के जिलाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी तथा बीपी स्कूल के प्राचार्य से बातचीत की जा चुकी है। सांसद ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि निर्माण प्रक्रिया में कथित रूप से अवैध हस्ताक्षर के आधार पर कार्य आगे बढ़ाने की शिकायत भी सामने आई है, जिसकी जांच होना आवश्यक है।
सांसद ने सुझाव दिया कि यदि अल्पसंख्यक छात्रावास का निर्माण करना ही है तो उसे ऐसे विद्यालय में बनाया जाए, जहाँ उर्दू माध्यम या अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों की संख्या अधिक हो, ताकि इसका वास्तविक लाभ जरूरतमंद छात्रों तक पहुँच सके।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि विद्यालय के शैक्षणिक माहौल, विद्यार्थियों के हित और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मामले पर पुनर्विचार किया जाए, ताकि बीपी स्कूल की शैक्षणिक गरिमा और छात्रों के हित सुरक्षित रह सकें।
