गोपल्लव झा AV भारत न्युज संवाददाता वीरपुर/ बेगुसराय
वीरपुर में विकास की रफ्तार पिछले कई वर्षों से ठप पड़ी हुई है। “सबका साथ, सबका विकास” का नारा भले ही अन्य क्षेत्रों में सटीक बैठता हो, लेकिन वीरपुर की स्थिति इससे बिल्कुल अलग नजर आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2011 से ही यहां के जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी विकास कार्यों में बाधक बने हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2011 में वीरपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु 2 करोड़ 48 लाख 58 हजार रुपये की राशि आई थी। लेकिन उस समय के जिला प्रशासन, सांसद और विधायक की कथित मिलीभगत से यह राशि दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दी गई। इसके बाद से आज तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई।
इसी तरह, वीरपुर बैद्यनाथ प्रसाद सिंह उच्च विद्यालय की चारदीवारी निर्माण को लेकर जनप्रतिनिधियों द्वारा शिलान्यास तो किया गया, लेकिन कुछ ही महीनों बाद शिलापट को हटा दिया गया और काम अधूरा ही रह गया। वहीं, वर्ष 2011 में सांसद द्वारा इस विद्यालय को मॉडल विद्यालय बनाने की घोषणा भी की गई थी, लेकिन इतने वर्षों के बाद भी इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई।

वीरपुर में जलजमाव की समस्या भी वर्षों से बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए जिला पदाधिकारी तुषार सिंगला सहित कई अधिकारियों और स्थानीय विधायक द्वारा बार-बार निरीक्षण किया गया और योजनाओं की आधारशिला भी रखी गई। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हो सका, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय व्यवसायियों और वीरपुर पश्चिम एवं पूर्वी पंचायत के हजारों लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण ही विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे जलजमाव की समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों के पास जाते हैं, तो उन्हें टालमटोल जवाब दिया जाता है।
हाल ही में आई तेज आंधी और बारिश के बाद स्थिति और खराब हो गई है। वीरपुर अस्पताल रोड से लेकर इमामबाड़ा चौक होते हुए गोला चौक तक पानी जमा है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
लोगों का कहना है कि पंचायत समिति, मुखिया, जिला पार्षद, विधायक, सांसद से लेकर प्रखंड और जिला प्रशासन तक के अधिकारी मानो गहरी नींद में सोए हुए हैं। अगर जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है।
