गौरव कुमार AV भारत न्युज संवाददाता बखरी/बेगूसराय
मोबाइल और टीवी के दौर में जहां बच्चे पढ़ाई और इल्म से दूर होते जा रहे हैं, वहीं बखरी क्षेत्र के हाफ़िज़ बिलाल अहमद ने महज़ 11 वर्ष 6 माह की उम्र में क़ुरआन-ए-पाक का हिफ़्ज़ मुकम्मल कर एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। उन्होंने मात्र ढाई वर्षों में पूरा क़ुरआन याद कर समाज के लिए प्रेरणास्पद मिसाल पेश की है।हाफ़िज़ बिलाल अहमद, मौलाना रशीद हुसैन नदवी के सुपुत्र हैं। उन्होंने यह उपलब्धि जामे मस्जिद इलियास के इमाम व ख़तीब मौलाना अनवर आज़म क़ासमी की निगरानी और मार्गदर्शन में हासिल की।
इस अवसर पर हाफ़िज़ नज़रुल हसन साहब ने बच्चों की हौसला-अफ़ज़ाई करते हुए कहा कि क़ुरआन से जुड़ने वाले बच्चे ही समाज के सच्चे रहनुमा बनते हैं।इस कामयाबी से चकहमीद, बखरी सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। लोगों ने इसे क्षेत्र और समाज के लिए गर्व की बात बताते हुए बच्चों को दीन की तालीम से जोड़ने की अपील की।हाफ़िज़ बिलाल अहमद की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक रौशन मिसाल है।
