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मौन साधना और साझेदारी, निर्वाचन कर्मी पूजा और पति गौरव ने एक साथ रखा करवाचौथ का कठिन व्रत
निर्वाचन ड्यूटी पर कर्तव्य और प्रेम का संगम
अशोक कुमार ठाकुर AV भारत न्युज संवाददाता तेघड़ा/बेगूसराय
इस वर्ष शुक्रवार को पड़े करवाचौथ के कठिन व्रत को निर्वाचन विभाग की कर्मी पूजा गांधी और उनके पति गौरवचंद्र गांधी ने साझा संकल्प के साथ निभाया। पूजा गांधी ने कार्यालय की व्यस्तता और निर्वाचन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के बीच निर्जला व्रत का कठिन संकल्प पूरा किया। यह साधना थी निर्वाचन कर्मी पूजा गांधी की।
पूरे दिन वे न सिर्फ़ अपनी ड्यूटी में लगी रहीं, बल्कि पानी की एक बूँद तक ग्रहण नहीं की। पति गौरवचंद्र गांधी के लिए रखे गए निर्जला करवाचौथ व्रत के दौरान, पूजा के हाथ में जहाँ एक ओर महत्वपूर्ण दस्तावेज़ थे, वहीं मन में व्रत की कथा और चांद निकलने का इंतज़ार था।
वहीं उनके पति गौरव ने भी अपनी पत्नी के इस त्याग में सहभागी बनते हुए, उनके लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। उनका यह निर्णय इस बात का प्रमाण है कि यह व्रत अब केवल एकतरफ़ा परंपरा नहीं, बल्कि दोनों के बीच प्रेम, समानता और त्याग का साझा बंधन बन गया है।
सहयोगियों ने जब पूजा गांधी को आराम करने का आग्रह किया, तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्र के प्रति कर्तव्य उनकी पहली प्राथमिकता है, लेकिन पति की दीर्घायु के लिए यह पारंपरिक व्रत भी उनके जीवन का अभिन्न अंग है।
शाम को ड्यूटी समाप्त होने के बाद जब पूजा गांधी घर पहुँचीं, तो थकान के बावजूद उनके चेहरे पर व्रत की पवित्र आभा थी। दोनों पति-पत्नी ने मिलकर पूजा की तैयारी की।
रात में (समय, लगभग 8:00 बजे) जैसे ही आसमान में चंद्रदेव के दर्शन हुए, पूजा ने पारंपरिक वेशभूषा में विधि-विधान से पूजा संपन्न की। छलनी से चंद्रमा को देखने के बाद उन्होंने पति गौरव के चेहरे का दीदार किया।
इसके पश्चात्, दोनों पति-पत्नी ने एक-दूसरे को जल पिलाकर और भोजन कराकर अपना चौबीस घंटे का कठिन व्रत तोड़ा।
नगर परिषद् बरौनी निवासी पूजा और गौरव का यह युगल समर्पण आधुनिक कामकाजी महिलाओं और उनके जीवनसाथियों के लिए एक सशक्त उदाहरण है कि किस प्रकार वे अपने पेशेवर ज़िम्मेदारियों और भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़े पारंपरिक मूल्यों के बीच सफलतापूर्वक संतुलन स्थापित कर सकती हैं।
यह साझा व्रत बताता है कि कर्म और धर्म दोनों के निर्वहन में जीवनसाथी की भागीदारी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।


